नई दिल्ली/गुवाहाटी: नए साल के मौके पर सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशियों की सौगात आई है। जहां पूरे देश में 8वें वेतन आयोग ($8^{th}$ Pay Commission) का बेसब्री से इंतजार हो रहा है, वहीं असम सरकार ने बाजी मारते हुए अपने सात लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने राज्य में 8वें वेतन आयोग के गठन का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही असम ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री ने पूरी की अपनी घोषणा
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 1 जनवरी 2026 को ही 8वें वेतन आयोग का वादा किया था और अब इसका गठन करके उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर दी है। इस आयोग का मुख्य काम राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन ढांचे, भत्तों और उनकी सेवा शर्तों की बारीकी से समीक्षा करना होगा। आयोग यह तय करेगा कि मौजूदा महंगाई और आर्थिक स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होनी चाहिए।
सुभाष चंद्र दास संभालेंगे आयोग की कमान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 8वें असम वेतन आयोग 2026 की अध्यक्षता सुभाष चंद्र दास करेंगे। वित्त विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, आयोग में कई वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। वित्त विभाग के सचिव इसमें ‘सदस्य सचिव’ के रूप में काम करेंगे। इनके अलावा कार्मिक विभाग, न्यायिक विभाग और गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रतुल महंत जैसे विशेषज्ञों को भी इस टीम का हिस्सा बनाया गया है। आयोग का मुख्यालय गुवाहाटी में होगा और इसे अगले 12 महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
किन्हें मिलेगा फायदा और कौन रहेगा बाहर?
इस वेतन आयोग का लाभ करीब सात लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा, लेकिन कुछ खास श्रेणियों को इससे बाहर रखा गया है:
- अखिल भारतीय सेवाएं: IAS और IPS अधिकारियों पर यह लागू नहीं होगा।
- न्यायिक सेवा: न्यायिक सेवा के अधिकारियों को इससे बाहर रखा गया है।
- तकनीकी संस्थान: UGC/AICTE के दायरे में आने वाले मेडिकल, इंजीनियरिंग और नर्सिंग कॉलेजों के कर्मचारियों को इस नए वेतन ढांचे में शामिल नहीं किया गया है।
परफॉर्मेंस और डिजिटल सुधार पर जोर
असम सरकार का उद्देश्य केवल वेतन बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि सरकारी काम-काज की रफ्तार बढ़ाना भी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वेतन संशोधन के दौरान डिजिटल तकनीक के उपयोग, मानव संसाधन सुधार और प्रदर्शन आधारित शासन (Performance-based governance) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य में पिछला वेतन संशोधन 1 अप्रैल 2016 को 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर हुआ था, इसलिए अब लंबे समय बाद एक व्यापक समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही थी।