संभल: समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद जियाउर रहमान बर्क ने शहज़ादा-ए-रसूल, नबासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु और शोहदा-ए-कर्बला की अज़ीम शहादत को दिल से सलाम पेश किया है। उन्होंने कर्बला की जंग और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए पूरी दुनिया के लिए एक बेहद अहम संदेश दिया है।
क्या है कर्बला का असली पैग़ाम?
सांसद जियाउर रहमान बर्क ने कहा कि कर्बला का मैदान हमें सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह हमें जिंदगी जीने का सबसे बड़ा सलीका सिखाता है। कर्बला हमें यह साफ पैग़ाम देती है कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, हक़ और इंसाफ़ की राह में हमेशा डटे रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सच्चाई के रास्ते पर बिना डरे खड़े रहना ही इंसान की असली कामयाबी है।
बातिल के आगे नहीं झुकाया सर
इमाम हुसैन के हौसले और उनकी कुर्बानी का जिक्र करते हुए सपा सांसद ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने बातिल (झूठ और जुल्म) के सामने कभी भी अपना सर नहीं झुकाया। उन्होंने जुल्म की ताकतों के आगे घुटने टेकने के बजाय डटकर मुकाबला करना चुना।
इस्लाम और इंसानियत की हिफ़ाज़त
जियाउर रहमान बर्क ने आगे कहा कि इमाम हुसैन ने अपने पूरे अहल-ए-बैत (परिवार) और वफ़ादार रफ़ीक़ों (साथियों) के साथ मिलकर मैदान-ए-कर्बला में जो अज़ीम शहादत दी, वह बेमिसाल है। उनकी इस महान कुर्बानी ने पूरी दुनिया को इस्लाम, इंसानियत, अद्ल (न्याय) और सच्चाई की हिफ़ाज़त करने का एक अमर पैग़ाम दिया है। आज भी उनकी कुर्बानी हर इंसान को जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देती है।