मुरादाबाद/ठाकुरद्वारा : उत्तर प्रदेश में चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन टिकट की चाहत में लोग क्या-क्या हथकंडे अपना सकते हैं, इसका ताजा उदाहरण मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में देखने को मिला है। यहां एक महाशय ने रातों-रात खुद को समाजवादी पार्टी का बड़ा नेता घोषित कर दिया। हद तो तब हो गई जब उन्होंने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, पीछे अखिलेश यादव की बड़ी सी फोटो वाली फ्लेक्सी टांगी और खुद को विधानसभा चुनाव का ‘प्रबल दावेदार’ घोषित कर दिया।
हवा-हवाई दावेदारी: जमीन पर काम शून्य, फ्लेक्सी पर नेताजी बने ‘हीरो’
ठाकुरद्वारा की राजनीति में इन ‘स्वयंभू’ नेताजी की एंट्री किसी फिल्मी सीन जैसी रही। बिना किसी सांगठनिक बैकग्राउंड या जनता के बीच पहचान के, उन्होंने सीधे मीडिया के सामने दावेदारी ठोक दी। प्रेस वार्ता में उन्होंने सपा की नीतियों का बखान ऐसे किया जैसे पार्टी का पूरा मेनिफेस्टो उन्होंने ही तैयार किया हो।
हालांकि, जैसे ही मीडिया और स्थानीय लोगों ने इनकी जमीनी पकड़ टटोली, तो सच्चाई सामने आ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने आज से पहले इन साहब को कभी किसी जनहित के मुद्दे पर नहीं देखा। चर्चा है कि राजनीति चमकाने के लिए उन्होंने केवल फोटो और बैनर का सहारा लिया है, जबकि असलियत में जनता के बीच उनका कोई वजूद नहीं है।
सपा पदाधिकारियों का बड़ा बयान: ‘ये हमारे कार्यकर्ता नहीं हैं’
इन कथित नेताजी की फजीहत तब और बढ़ गई जब समाजवादी पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने उन्हें पहचानने तक से इनकार कर दिया। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने दोटूक लहजे में कहा, “हम इन्हें नहीं जानते। ये न कभी पार्टी की बैठकों में दिखे और न ही कभी संघर्ष में साथ रहे। ये पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी हैं या नहीं, इस पर संदेह है।”
सपा कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है कि कोई अनजान व्यक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष की तस्वीर का इस्तेमाल करके जनता को गुमराह कर रहा है। पदाधिकारियों का मानना है कि बिना अनुमति के पार्टी के झंडे और फोटो का इस्तेमाल करना अनुशासनहीनता है और ऐसे ‘पैराशूट’ दावेदोरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अखिलेश की फोटो बनी ‘कवच’, पर कब तक?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि इन नेताजी ने अखिलेश यादव की लोकप्रियता का फायदा उठाने के लिए उनकी फोटो को ‘सुरक्षा कवच’ की तरह इस्तेमाल किया है। उन्हें लगा था कि बड़ी फ्लेक्सी और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए वो चर्चा में आ जाएंगे, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। अब लोग उनके राजनीतिक ‘अनाड़ीपन’ पर चटखारे ले रहे हैं। ठाकुरद्वारा की जनता अब सवाल उठा रही है कि क्या राजनीति अब इतनी सस्ती हो गई है कि कोई भी फ्लेक्सी छपवाकर खुद को ‘भावी विधायक’ बताने लगे?