मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक तहसीलदार का सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो अब उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। मामला इतना गरमा गया है कि एडीएम फाइनेंस ममता मालवीय ने ठाकुरद्वारा के तहसीलदार को सोमवार को अपने कार्यालय में तलब किया है। इस दौरान उनके बयान दर्ज किए जाएंगे और वायरल वीडियो की सच्चाई का पता लगाया जाएगा। पिछले दो दिनों से यह वीडियो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आखिर क्या है वायरल वीडियो का पूरा मामला?
तहसीलदार साहब का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि ‘नो एंट्री’ के बावजूद काशीपुर (उत्तराखंड) की ओर से खनन से भरे डंपर आ रहे हैं। इसी सूचना पर वे चेकिंग के लिए निकले थे और उन्होंने दो डंपरों को पकड़ भी लिया था। लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब तहसीलदार साहब को बीजेपी का झंडा लगी एक गाड़ी में देखा गया। खनन जैसे संवेदनशील मामले में एक सरकारी अधिकारी का बीजेपी की गाड़ी में दिखना कई सवाल खड़े कर रहा है।
तहसीलदार की सफाई: कोहरा, पेड़ और लिफ्ट की कहानी
अपनी सफाई में तहसीलदार ने बताया कि कार्रवाई के बाद जब वे लौट रहे थे, तो घने कोहरे के कारण उनकी सरकारी गाड़ी एक पेड़ से टकरा गई। गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उन्होंने सड़क से गुजर रही एक निजी गाड़ी से लिफ्ट ली थी। तहसीलदार के मुताबिक, उन्हें नहीं पता था कि उस गाड़ी पर भाजपा का झंडा लगा है। इस मामले में वे पहले ही जिलाधिकारी (DM) से मिलकर अपनी सफाई पेश कर चुके हैं।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल: पुलिस से क्यों नहीं मांगी मदद?
तहसीलदार की इस ‘लिफ्ट’ वाली कहानी ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर सरकारी गाड़ी खराब हुई थी, तो तहसीलदार ने स्थानीय पुलिस या एसडीएम से मदद क्यों नहीं मांगी? आज के दौर में जब आम आदमी भी 112 डायल करके पुलिस की मदद ले लेता है, तो एक तहसीलदार ने बीजेपी के झंडे वाली गाड़ी में बैठना क्यों बेहतर समझा? क्या यह महज एक इत्तेफाक था या फिर खनन के इस खेल में पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है?