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अलविदा गुरुजी! ठाकुरद्वारा को ‘स्टेनो हब’ बनाने वाले रामसिंह का निधन, नम आंखों से दी गई विदाई।

On: April 9, 2026 6:25 PM
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मुरादाबाद जनपद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र के लिए आज की सुबह एक बेहद दुखद और हृदयविदारक खबर लेकर आई है। इलाके में ‘स्टेनो क्रांति’ के असली सूत्रधार और हजारों बेरोजगार युवाओं के भविष्य को संवारने वाले आदरणीय गुरुजी श्री रामसिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार, 8 अप्रैल 2026 की रात उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनके निधन की खबर सोशल मीडिया और क्षेत्र में फैली, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुजी केवल एक शिक्षक नहीं थे, बल्कि वह अपने आप में एक ऐसी संस्था थे जिन्होंने ठाकुरद्वारा जैसे छोटे से कस्बे को पूरे प्रदेश में ‘स्टेनो हब’ के रूप में पहचान दिलाई।

शिक्षा और रोजगार की जगाई थी अनोखी अलख

रामसिंह गुरुजी को ठाकुरद्वारा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के जरिए रोजगार की नई अलख जगाने का श्रेय दिया जाता है। मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था, जिसके चलते बुधवार रात उन्होंने इस नश्वर संसार को त्याग दिया। उनके निधन की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध वर्ग और देश-विदेश में फैले उनके हजारों शिष्यों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि गुरुजी का जाना क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

‘स्टेनो क्रांति’ से बदला हजारों परिवारों का भविष्य

रामसिंह गुरुजी का योगदान केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं था। उन्होंने उस दौर में ‘स्टेनो क्रांति’ की शुरुआत की थी, जब ग्रामीण युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाना एक कठिन सपने जैसा था। अपने बेहद सरल स्वभाव और शॉर्टहैंड सिखाने के अनोखे अंदाज की वजह से वह छात्रों के बीच पिता तुल्य लोकप्रिय थे। उनके कुशल मार्गदर्शन में पढ़कर आज हजारों युवा देश के विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, अदालतों और अन्य विभागों में स्टेनोग्राफर व निजी सचिव के पदों पर ऊंचे वेतन पर सेवाएं दे रहे हैं।

हुनर को बनाया रोजगार की सबसे बड़ी गारंटी

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुजी हमेशा कहते थे कि हुनर ही रोजगार की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने ठाकुरद्वारा में अपने सेंटर की स्थापना कर न केवल शॉर्टहैंड सिखाया, बल्कि युवाओं के भीतर अनुशासन और कड़ी मेहनत का जज्बा भी पैदा किया। आज ठाकुरद्वारा के लगभग हर दूसरे घर में अगर कोई व्यक्ति सरकारी सेवा में है, तो उसके पीछे कहीं न कहीं गुरुजी की मेहनत और शिक्षा का प्रभाव साफ नजर आता है। उन्होंने साधारण परिवार के बच्चों को भी अधिकारी बनने का सपना देखना और उसे पूरा करना सिखाया।

नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

आज सुबह 11:00 बजे गुरुजी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। गुरुजी को अंतिम विदाई देने के लिए भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, भाजपा नेता गौरव चौहान समेत भारी संख्या में क्षेत्रवासी, छात्र और गणमान्य नागरिक पहुंचे। हर किसी की आंखें नम थीं और जुबां पर गुरुजी के प्रति सम्मान था। ठाकुरद्वारा हमेशा अपने इस महान शिक्षक का ऋणी रहेगा जिन्होंने गुमनामी में जी रहे युवाओं को कामयाबी का रास्ता दिखाया।

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