धर्म की नगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने पूरे प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पिछले 24 घंटे से आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। शंकराचार्य के इस कड़े फैसले ने मेले की व्यवस्थाओं को हिलाकर रख दिया है। उनके शिष्यों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, स्वामी जी ने रविवार से ही अन्न और जल का पूरी तरह त्याग कर दिया है और अपनी मांगों को लेकर अड़ गए हैं।
अब फुटपाथ ही होगा शंकराचार्य का नया ठिकाना
अनशन के साथ-साथ शंकराचार्य ने एक ऐसा संकल्प लिया है जिसने सबको चौंका दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वह अब हर साल माघ मेले में आएंगे, लेकिन वह किसी आलीशान पंडाल या सरकारी इंतजामों में नहीं रुकेंगे। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह अब एक आम श्रद्धालु की तरह फुटपाथ पर ही डेरा डालेंगे और जमीन पर रहकर ही अपना समय व्यतीत करेंगे। उनके इस कड़े तेवर और सादगी भरे संकल्प को देखकर वहां मौजूद लाखों श्रद्धालु भावुक हो उठे हैं।
मौनी अमावस्या पर संगम की राह में हुआ था हंगामा
इस पूरे विवाद की जड़ मौनी अमावस्या के दिन हुई एक घटना है। बताया जा रहा है कि जब शंकराचार्य अपने भव्य रथ पर सवार होकर संगम की ओर स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उनका रास्ता रोक दिया। प्रशासन की इस अचानक कार्रवाई से शंकराचार्य के अनुयायी भड़क गए। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और पुलिस व समर्थकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। समर्थकों ने गुस्से में आकर पुलिस बैरिकेडिंग तक तोड़ने की कोशिश की।
अपमान के आरोप से गरमाया मामला
तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब पुलिस ने शंकराचार्य के रथ को जबरन खींचकर स्नान घाट से करीब एक किलोमीटर दूर हटा दिया। शंकराचार्य और उनके शिष्यों ने इसे अपना घोर अपमान माना है। इसी नाराजगी और अपमान के विरोध में उन्होंने अनशन का रास्ता चुना है। फिलहाल संगम तट पर भारी पुलिस बल तैनात है और शंकराचार्य के समर्थन में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं।