मुरादाबाद: मदरसा अजीजिया दारुल फलाह, शरीफ नगर में सालाना जलसे का बड़े ही धूमधाम और अकीदत के साथ आयोजन किया गया। इस मुबारक मौके पर दीन की तालीम पूरी करने वाले सात बच्चों की दस्तारबंदी की गई। कार्यक्रम की शुरुआत कारी कमर इस्लाम ने बेहद खूबसूरत अंदाज में कुरान की तिलावत के साथ की। इसके बाद अमरोहा से आए मौलाना सलमान ने अपनी सुरीली आवाज में नातिया कलाम पेश किया, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद लोग भावविभोर हो गए।
नमाज और जिक्र-ए-इलाही की अहमियत
मुरादाबाद से तशरीफ लाए मौलाना जुबेर आलम ने जलसे को संबोधित करते हुए नमाज की पाबंदी और अल्लाह के जिक्र पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अल्लाह की याद ही इंसान के दिल को सुकून पहुंचा सकती है। उन्होंने समाज में नमाज के प्रति जागरूकता फैलाने और अल्लाह के बताए रास्तों पर चलने की अपील की, ताकि दुनिया और आखिरत दोनों संवर सकें।
होनहार छात्र-छात्राओं की हुई दस्तारबंदी
जलसे का सबसे भावुक और गर्व का पल वह था जब हिफ्ज पूरा करने वाले छात्रों का सम्मान किया गया। हाफिज मोहम्मद फैजान, हाफिज मोहम्मद अरशद, हाफिज मोहम्मद अमीर और हाफिज मोहम्मद आतिफ के सिर पर दस्तार (पगड़ी) बांधी गई। साथ ही, छात्रा जन्नत निशा और जैनब खातून की भी हौसला अफजाई की गई। इन बच्चों की इस उपलब्धि पर उनके अभिभावकों की आंखों में खुशी के आंसू नजर आए।
इस्लाम देता है सभी धर्मों के सम्मान का संदेश
मौलाना मजाहिर उल हक ने मौजूदा हालातों पर रोशनी डालते हुए एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि इस्लाम धर्म कभी भी दूसरे धर्मों को बुरा कहने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने चेतावनी दी कि जब समाज में बुराइयां बढ़ने लगती हैं, तो हम अल्लाह के गुस्से का शिकार हो जाते हैं। अगर हमें अपनी परेशानियों और बेचैनी से निजात चाहिए, तो सबसे पहले अपने अंदर और समाज की बुराइयों को खत्म करना होगा।
झूठ से बचें और अमानतदारी अपनाएं
मौलाना ने इस बात पर चिंता जताई कि आज के दौर में समाज से अमानतदारी और सच्चाई खत्म होती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब इंसान सच के बजाय झूठ को तरजीह देने लगता है, तब कुदरत का कहर नाजिल होता है। समाज में ईमानदारी और सच का बोलबाला होना बहुत जरूरी है। इस मौके पर कुरान हिफ्ज करने वाले छात्र हाफिज मोहम्मद फैजान, हाफिज मोहम्मद अरशद, हाफिज मोहम्मद अमीर, हाफिज मोहम्मद आतिफ और छात्राओं में जन्नत निशा व जैनब खातून की दस्तारबंदी कर उन्हें सम्मानित किया गया।
इलाके की जानी-मानी हस्तियों ने दी शिरकत
जलसे की सदारत मौलाना सिद्दीक अहमद ने की और संचालन (निजामत) मौलाना नजीबुल हक ने बखूबी संभाला। इस खास मौके पर मदरसे के मोहतमिम हाजी वसीम अहमद (भट्टे वाले), सदर डॉक्टर जहांगीर सैफी, पूर्व प्रधान एम इल्यास, प्रधान पति गयासुद्दीन नवाब, मास्टर नजमुल इस्लाम, मास्टर मोइनुद्दीन, कारी मोहम्मद वसीम, हाफिज बिलाल, हाजी सलीम मोहम्मद, मोहम्मद दानिश, अजीम अहमद, मास्टर अनीसुर्रहमान, कारी इरशाद, हाजी सरफराज, मोहम्मद ओवैस और मोहम्मद कामरान समेत भारी तादाद में लोग मौजूद रहे।