भारत की सांस्कृतिक विरासत को अगर किसी एक धागे में पिरोया जाए, तो वह उत्तर प्रदेश है। यहाँ राम की अयोध्या, कृष्ण की मथुरा, बुद्ध का सारनाथ और गंगा-यमुना का संगम है। ताजमहल की खूबसूरती हो या बनारस की शाम, यह धरती अध्यात्म और राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र है। आज 24 जनवरी को यूपी अपना 76वाँ स्थापना दिवस मना रहा है। आइए जानते हैं, कैसे एक ‘प्रान्त’ से यह ‘प्रदेश’ बना और इससे जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प बातें।
यूनाइटेड प्रोविंस से उत्तर प्रदेश बनने का रोमांचक सफर
उत्तर प्रदेश का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1775 से 1816 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी ने कई रियासतों को जीतकर इसे बंगाल प्रेसीडेंसी में मिलाया था। 1833 में इसे ‘आगरा प्रेसीडेंसी’ नाम दिया गया। फिर 1856 में जब अवध पर कब्जा हुआ, तो 1877 में इसे ‘संयुक्त प्रांत’ (United Provinces) बना दिया गया। 1902 में ब्रिटिश शासन ने इसे ‘यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध’ का नाम दिया।
आजादी के बाद, 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर ‘उत्तर प्रदेश’ कर दिया गया। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल यूपी दिवस मनाया जाता है।
इलाहाबाद से लखनऊ कैसे शिफ्ट हुई राजधानी?
क्या आप जानते हैं कि पहले यूपी की राजनीति का केंद्र इलाहाबाद (अब प्रयागराज) हुआ करता था? 1920 में जब पहली विधान परिषद के चुनाव हुए, तब 1921 में लखनऊ में इसका गठन हुआ। उस समय के गवर्नर हरकोर्ट बटलर ने अपना ठिकाना इलाहाबाद से लखनऊ शिफ्ट कर लिया। धीरे-धीरे 1935 तक सारे सरकारी दफ्तर लखनऊ आ गए और यह शहर राज्य की नई राजधानी बन गया।
योगी सरकार ने 2018 में शुरू की नई परंपरा
भले ही यूपी 1950 में बना था, लेकिन ‘यूपी दिवस’ मनाने की शुरुआत बहुत बाद में हुई। जब 2014 में राम नाईक राज्यपाल बने, तो उन्होंने इसका प्रस्ताव रखा था। पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2017 में घोषणा की कि हर साल 24 जनवरी को स्थापना दिवस मनाया जाएगा। पहली बार 2018 में इसे आधिकारिक रूप से पूरे उत्साह के साथ मनाया गया।
राजनीति का ‘पावर हाउस’ है उत्तर प्रदेश
दिल्ली की गद्दी का रास्ता यूपी से होकर ही गुजरता है। इस राज्य ने देश को एक से बढ़कर एक प्रधानमंत्री दिए हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी तक, सभी ने यूपी की धरती से ही नेतृत्व किया है।
इतना ही नहीं, महिला सशक्तिकरण के मामले में भी यूपी आगे रहा। देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी 1963 में यहीं बनी थीं। वहीं, मायावती के रूप में देश को पहली दलित महिला मुख्यमंत्री भी उत्तर प्रदेश ने ही दी।