कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। जहाँ पुलिस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वहीं यहाँ के कुछ पुलिसकर्मी खुद ही हुक्का बार चलवाने और वसूली करने के काले धंधे में शामिल पाए गए। इस मामले के उजागर होने के बाद पुलिस आयुक्त ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को पद से हटा दिया है, जिनमें दो दरोगा और दो सिपाही शामिल हैं।
सांसदों और भाजपा पदाधिकारियों ने खोली पोल
इस पूरे मामले का खुलासा बीते शुक्रवार को हुआ, जब कानपुर पुलिस ऑफिस के सभागार में सांसद, भाजपा जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में जनप्रतिनिधियों ने पुलिस आयुक्त के सामने थानेदारों और पुलिसकर्मियों की शिकायतों का अंबार लगा दिया। पदाधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस वाले न केवल जनता बल्कि जनप्रतिनिधियों का फोन नहीं उठाते और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार करते हैं। इसी दौरान थाना क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की बिक्री और पुलिस की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए।
दरोगा और सिपाही ही निकले हुक्का बार के ‘मालिक’
बैठक में सबसे हैरान करने वाला आरोप बर्रा और स्वरूप नगर थाने के पुलिसकर्मियों पर लगा। बताया गया कि बर्रा थाने में तैनात एसआई अंकुर विहार और सिपाही अंकित कसाना अपने क्षेत्र में हुक्का बार चलवा रहे हैं। वहीं, स्वरूप नगर थाने में तैनात दारोगा रविंद्र राणा और सिपाही सोनू कुमार पर अवैध वसूली के आरोप लगे। खाकी की इस काली करतूत को सुनकर पुलिस आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के आदेश दे दिए।
कमिश्नर का हंटर और विभागीय कार्रवाई
शिकायतों की पुष्टि होने के बाद पुलिस आयुक्त ने शनिवार को तत्काल प्रभाव से चारों पुलिसकर्मियों पर गाज गिरा दी। डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने दारोगा रवीन्द्र राणा और सिपाही सोनू कुमार को हटा दिया, जबकि डीसीपी साउथ रवीन्द्रनाथ चौधरी ने दारोगा अंकुर विहार और सिपाही अंकित कसाना को बर्रा थाने से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया। पुलिस आयुक्त ने साफ कर दिया है कि अनुशासनहीनता और अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा और इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी जारी रहेगी।