जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। प्रताप नगर इलाके में एक बुजुर्ग के शव को दफनाने को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि अंत में डेड बॉडी को कब्रिस्तान से वापस घर लाना पड़ा। रविवार दोपहर हुई इस घटना के बाद से मुस्लिम पक्ष में भारी रोष है और उन्होंने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
कब्रिस्तान या पार्क? जमीन पर छिड़ा कानूनी दंगल
पूरा मामला प्रताप नगर के श्योपुर का है, जहाँ 85 वर्षीय नजीर खान के निधन के बाद परिजन दोपहर करीब 1 बजे अंतिम संस्कार के लिए हल्दीघाटी गेट स्थित कब्रिस्तान पहुंचे थे। जैसे ही दफनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह जमीन कब्रिस्तान नहीं बल्कि एक पार्क है, वहीं मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि साल 1991 से वहां कब्रिस्तान रिकॉर्ड में मौजूद है।
8-10 घंटे घर में रखा रहा शव, पुलिस पर उठे सवाल
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर तो पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने विवाद सुलझाने के बजाय शव को दफनाने से ही रोक दिया और उसे वापस घर भेज दिया। मृतक के परिजन करीब 8 से 10 घंटे तक शव लेकर बैठे रहे, जबकि समुदाय के अन्य लोग थाने के बाहर जमा होकर कार्रवाई की मांग करते रहे। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उन्होंने कब्रिस्तान के पुराने दस्तावेज भी पेश किए, लेकिन पुलिस ने न तो उनकी शिकायत दर्ज की और न ही विरोध करने वालों पर कोई एक्शन लिया।
पुलिस का दावा: ‘मामला मामूली है’
दूसरी ओर, पुलिस इस पूरे विवाद को बड़ी घटना नहीं मान रही है। प्रताप नगर थाना पुलिस का कहना है कि उनके पास कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं आई है और यह केवल एक छोटी-मोटी बात थी जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में लोग थाने के बाहर खड़े होकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते दिख रहे हैं।
किसी भी धर्म में मृतक के अंतिम संस्कार में बाधा डालना एक गंभीर विषय है। अब देखना यह होगा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले में जयपुर प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और कब्रिस्तान की जमीन का विवाद कैसे हल होता है।