मुरादाबाद: अपनी बेबाक कविताओं और प्रखर वक्ताओं के लिए मशहूर डॉ. कुमार विश्वास हाल ही में पीतल नगरी मुरादाबाद पहुंचे। यहाँ उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच चल रहे गरमा-गरम विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, उन्होंने इस मामले में किसी का पक्ष लेने के बजाय बेहद संतुलित रुख अपनाया। कुमार विश्वास ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनके भीतर इतनी सामर्थ्य या हैसियत नहीं है कि वे पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज जैसे उच्च कोटि के संत पर कोई टिप्पणी करें। उनके इस बयान ने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों का दिल जीत लिया और शब्दों की मर्यादा पर एक नई बहस छेड़ दी।
प्रशासन को दी संवेदनशीलता बरतने की नसीहत
कुमार विश्वास ने प्रशासन और संतों के बीच के इस टकराव पर विस्तार से बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरे मामले के दो पहलू हैं और किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले गंभीरता से सोचना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि जब भी किसी संत, साधु या धर्म के प्रति समर्पित व्यक्ति से बातचीत की जाए, तो उसमें संवेदनशीलता और जिम्मेदारी होनी चाहिए। कुमार विश्वास के मुताबिक, भगवा धारण करने वाला व्यक्ति केवल एक इंसान नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक होता है, इसलिए उनके साथ संवाद में सम्मान और संतुलन बहुत जरूरी है।
शंकराचार्य से ‘सात्विक क्रोध’ त्यागने की प्रार्थना
प्रशासन को नसीहत देने के साथ ही कुमार विश्वास ने पूज्य शंकराचार्य से भी एक विनम्र आग्रह किया। उन्होंने संतों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए प्रार्थना की कि वे अपने ‘सात्विक क्रोध’ को त्याग दें और सभी पर अपनी कृपा बरसाएं। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि संतों की ओर से भी संवाद और संयम की आवश्यकता है। उनके इस संदेश को वहां मौजूद श्रोताओं ने एक बहुत ही समझदारी भरा कदम बताया।
हादसे का शिकार हुए शायर के परिवार से की मुलाकात
साहित्यिक कार्यक्रम ‘उदीषा’ में शिरकत करने से पहले कुमार विश्वास शहर के प्रसिद्ध शायर मंसूर उस्मानी के घर पहुंचे। हाल ही में एक दर्दनाक हादसे में मंसूर उस्मानी की बेटी का निधन हो गया था। कुमार विश्वास ने शोक-संतप्त परिवार से मिलकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और कहा कि दुख की इस घड़ी में वे पूरी तरह उनके साथ खड़े हैं।
मुरादाबाद की साहित्यिक विरासत को किया सलाम
समारोह के दौरान कुमार विश्वास ने मुरादाबाद की मिट्टी को नमन किया। उन्होंने जिगर मुरादाबादी, माहेश्वर तिवारी, हुल्लड़ मुरादाबादी और मंसूर उस्मानी जैसे महान साहित्यकारों का नाम लेते हुए कहा कि इस शहर ने देश को महान गीतकार और शायर दिए हैं। उन्होंने ‘उदीषा’ जैसे आयोजनों की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने का सबसे बेहतरीन जरिया हैं।