मुरादाबाद: पीतल नगरी मुरादाबाद के सुरजन नगर में गुरुवार को भक्ति और राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्थानीय संस्कार पैलेस के प्रांगण में 100वीं शताब्दी के गौरवशाली उपलक्ष्य में ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ और संतों के विचारों ने पूरे क्षेत्र को भगवा रंग में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि RSS प्रांत प्रचारक अनिल कुमार और पूज्य बच्चा बाबा सहित कई दिग्गज संतों ने दीप प्रज्वलित कर की।
जाति के बंधन तोड़ो और राष्ट्र को प्रथम रखो
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अनिल कुमार ने स्वामी विवेकानंद के कालजयी विचारों को याद किया। उन्होंने ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’ का उद्घोष करते हुए कहा कि राष्ट्र सेवा के लिए हिंदुओं की एकजुटता समय की मांग है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संघ की शक्ति ही समाज की असली शक्ति है। हमें जाति-पाति के भेदभाव को पूरी तरह भुलाकर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।
संस्कारित परिवार ही मजबूत समाज की नींव
कार्यक्रम में स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर परिवार संस्कारित होगा, तभी एक मजबूत समाज का निर्माण संभव है। स्वामी जी ने जब ‘वीरों की जननी माँ को प्रणाम’ देशभक्ति गीत गाया, तो पूरा पंडाल जोश और तालियों की गड़गड़ाहत से गूंज उठा। वहीं स्वामी ऋषिराजगिरी ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत को विश्व शांति का एकमात्र रास्ता बताया।
अमृता देवी का बलिदान और प्रकृति रक्षा
सत्यदेवानंद जी ने हिंदू धर्म के प्रति जागरूकता पर जोर देते हुए गुरु जम्भेश्वर जी के सिद्धांतों का स्मरण कराया। उन्होंने जीव रक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भारतीय संस्कृति का आधार बताया। खेजड़ली बलिदान की वीर गाथा सुनाते हुए उन्होंने अमृता देवी विश्नोई के साहस का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस संस्कृति में वृक्षों को बचाने के लिए 363 लोग शहीद हो सकते हैं, वह समाज कभी कमजोर नहीं हो सकता। हमें प्रकृति और धर्म की रक्षा के लिए उसी बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए।