मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों जो कुछ भी हो रहा है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। अजित पवार के निधन के बाद राज्य अभी शोक में ही डूबा था कि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है। उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ ने इस पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे गृह मंत्री अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस की एक और बड़ी राजनीतिक चाल बताया है।
सदमे से उबरा भी नहीं था महाराष्ट्र और हो गया शपथ ग्रहण
‘सामना’ के संपादकीय में लिखा गया है कि महाराष्ट्र अभी अजित पवार के जाने के गम से बाहर भी नहीं निकल पाया था कि राज्य को दूसरा झटका दे दिया गया। लेख में बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा गया कि अजित पवार की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। हालांकि कुछ लोग इसे महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री मिलने की उपलब्धि बता रहे हैं, लेकिन सामना ने सवाल उठाया कि यह पद प्रशासनिक योग्यता के आधार पर मिला है या किसी राजनीतिक साजिश के तहत?
शरद पवार और सुप्रिया सुले भी रह गए हैरान
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले को भी इसकी भनक नहीं लगी। ‘सामना’ के अनुसार, सुनेत्रा पवार अपने दोनों बेटों के साथ गुपचुप तरीके से मुंबई पहुंचीं और राजभवन जाकर शपथ ले ली। जब शरद पवार से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़े शांत भाव से कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अजित पवार के बाद अब प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे लोग पार्टी की कमान संभाल रहे हैं। सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया भी कुछ ऐसी ही थी, जिससे यह साफ होता है कि परिवार के भीतर इस फैसले को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी।
हिंदुत्व के ढांचे पर सवाल और जल्दबाजी की वजह
शिवसेना (यूबीटी) ने इस शपथ ग्रहण के समय पर भी सवाल उठाए हैं। संपादकीय में कहा गया कि पवार परिवार में शोक की अवधि चल रही थी, ऐसे में यह समारोह हिंदुत्व के ढांचे और परंपराओं में फिट नहीं बैठता। आखिर ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि नेतृत्व का खालीपन भरने के लिए कुछ दिन का भी इंतजार नहीं किया गया? सामना का आरोप है कि यह सब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर हो रहा है, जो राजनीति के गिरते स्तर का प्रमाण है।
पटेल बनाम पवार: पार्टी बचाने की अंदरूनी जंग?
सामना ने एक वैकल्पिक हकीकत भी पेश की है। लेख में दावा किया गया है कि अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी में पद को लेकर होड़ मच गई थी। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी। ऐसे में “पवार-पाटिल” की पार्टी को “पटेल” पार्टी बनने से रोकने के लिए आनन-फानन में सुनेत्रा पवार को उप-सिंहासन पर बिठा दिया गया। सामना का आरोप है कि पार्टी में आई अस्थिरता और कुछ नेताओं की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के कारण यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है।