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UP का ‘कब्रों वाला गांव’: यहाँ मुर्दों के साथ रहते हैं जिंदा लोग, घर के अंदर का नजारा देख उड़ जाएंगे होश!

On: February 3, 2026 11:03 AM
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आगरा: दुनिया में हर धर्म के अपने रीति-रिवाज होते हैं। इंसान की मृत्यु के बाद कहीं उसे जलाया जाता है तो कहीं दफनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि लोग अपनों को दफनाने के बाद उसी कब्र के साथ, उसी घर में रहने को मजबूर हों? शायद आपको यकीन न हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के एक गांव में ‘जिंदगी और मौत’ एक ही छत के नीचे बसती है। यहाँ के घरों में चूल्हा जलता है, बच्चे खेलते हैं और ठीक बगल में मौजूद होती है किसी अपने की कब्र।

घर के कोने में कब्र और बगल में जलता चूल्हा

यह अजब-गजब और दिल दहला देने वाला मामला ताजनगरी आगरा से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित ‘छह पोखर’ गांव का है। बाहर से देखने पर यह गांव बिल्कुल सामान्य लगता है, लेकिन इसकी गलियों के भीतर की हकीकत झकझोर देने वाली है। किरावली तहसील के अछनेरा इलाके में स्थित इस गांव के करीब 15 मुस्लिम परिवारों के घरों में अपनों की कब्रें बनी हुई हैं। यहाँ मौत की खामोश निशानी हर घर का हिस्सा बन चुकी है। जहाँ परिवार खाना बनाता है, वहीं ठीक पास में किसी न किसी पूर्वज या मासूम बच्चे की मज़ार बनी हुई है।

परंपरा नहीं, बरसों पुरानी मजबूरी का है खेल

हैरानी की बात यह है कि घर में अपनों को दफनाना यहाँ का कोई रिवाज या परंपरा नहीं है, बल्कि यह इन लोगों की बहुत बड़ी मजबूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मुस्लिमों के लिए कोई कब्रिस्तान ही नहीं है। न्यूज 18 की टीम जब गांव पहुंची, तो लोगों का दर्द छलक पड़ा। ग्रामीणों ने नम आंखों से बताया कि “जब दफनाने के लिए जगह ही नहीं है, तो इंसान क्या करे? मजबूरी में हमें अपनों को अपने ही आंगन या कमरों में सुपुर्द-ए-खाक करना पड़ता है।”

कब्रों पर खेलते बच्चे और सिसकती जिंदगी

इस गांव की तस्वीरों में दिखता है कि जहाँ बच्चे मासूमियत से खेल रहे हैं, वहीं उनके नीचे किसी की आखिरी आरामगाह है। लोग बताते हैं कि वे जमीन के मालिक नहीं हैं और गांव में सरकारी जमीन न होने के कारण कब्रिस्तान के लिए जगह नसीब नहीं हो पाई है। आलम यह है कि जब भी किसी की मौत होती है, तो घर के किसी कोने में गड्ढा खोदा जाता है और शव को दफना दिया जाता है। आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन गरीब परिवारों को मौत के बाद नसीब होने वाली ‘दो गज जमीन’ कभी मिल पाएगी?

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