बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में इस वक्त भारी उबाल देखने को मिल रहा है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जेडी(एस) ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार की पूरी रात विपक्षी विधायकों ने विधानसभा के अंदर ही धरना दिया। विपक्ष की एक ही मांग है—राज्य के आबकारी (Excise) मंत्री आर बी तिम्मापुर का तुरंत इस्तीफा।
6,000 करोड़ का कथित घोटाला और चुनावी फंडिंग का आरोप
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस मामले में बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग में करीब 6,000 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला हुआ है। अशोक का कहना है कि शराब के लाइसेंस जारी करने के बदले शराब कारोबारियों से मोटी रिश्वत वसूली जा रही है। उन्होंने एक गंभीर आरोप यह भी लगाया कि कर्नाटक से इकट्ठा किया गया यह पैसा कांग्रेस पार्टी उन राज्यों में भेज रही है जहां चुनाव होने वाले हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई से खुला राज
इस विवाद को हवा तब मिली जब हाल ही में 16 जनवरी को बेंगलुरु में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। लोकायुक्त ने एक्साइज डिप्टी कमिश्नर जगदीश नाइक और दो अन्य अधिकारियों को 25 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि ये अधिकारी CL-7 (होटल और बोर्डिंग हाउस) और माइक्रो ब्रूअरी लाइसेंस देने के बदले 80 लाख रुपये की डिमांड कर रहे थे। इस गिरफ्तारी के बाद से ही विपक्षी दल मंत्री तिम्मापुर के इस्तीफे पर अड़ गए हैं।
मंत्री का बचाव: ‘भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं’
वहीं दूसरी ओर, आबकारी मंत्री आर बी तिम्मापुर ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने अपने बचाव में तर्क दिया कि बीजेपी सरकार के शासनकाल में भी मंत्रियों ने कभी इस्तीफा नहीं दिया था। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है, बल्कि उन्होंने तो इसे कम करने का काम किया है। मंत्री का दावा है कि मुख्यमंत्री सिद्धरामैया के साथ मिलकर उन्होंने लाइसेंस प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा सरल और पारदर्शी बनाया है।
आज कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र का आखिरी दिन है। जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसे देखते हुए आज भी सदन में जबरदस्त हंगामे और नारेबाजी के आसार हैं।