नई दिल्ली: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील (Trade Deal) पर मुहर लग गई है। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस डील की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसमें ऊर्जा क्षेत्र और क्रूड ऑयल को लेकर बड़ी रणनीतियां बनाई गई हैं, लेकिन साथ ही भारत ने अपने करोड़ों किसानों और पशुपालकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।
किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं
भारत और अमेरिका के बीच हुई इस डील में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह से बाहर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाना था, लेकिन सरकार ने यह साफ कर दिया कि वह सस्ते विदेशी आयात की कीमत पर अपने किसानों के हितों की बलि नहीं चढ़ाएगी।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में खेती और डेयरी का काम पूरी तरह मशीनीकृत और बड़े कॉर्पोरेट स्तर पर होता है। इसके उलट, भारत में आज भी छोटे और सीमांत किसान पारंपरिक तरीकों से अपनी आजीविका चलाते हैं। अगर अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए रास्ते खोल दिए जाते, तो भारतीय पशुपालकों के लिए उनका मुकाबला करना नामुमकिन हो जाता।
एक्सपोर्टर्स की चांदी, टैरिफ में बड़ी कटौती
इस समझौते के तहत भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क (Tariff) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस 7 प्रतिशत की कटौती से भारतीय उत्पादों की मांग अमेरिकी बाजार में बढ़ेगी और देसी कारोबारियों को जबरदस्त मुनाफा होने की उम्मीद है।
क्यों जरूरी थी किसानों की सुरक्षा?
भारत में कृषि क्षेत्र लगभग 45 प्रतिशत आबादी को रोजगार देता है। हमारा डेयरी सेक्टर भी उन छोटे किसानों के भरोसे है जिनके पास बमुश्किल एक या दो मवेशी होते हैं। विकसित देश जैसे अमेरिका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया अपने किसानों को भारी सब्सिडी देते हैं।