मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर की सियासी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। शहर में आयोजित सपा के ‘पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन’ में उस वक्त भारी बवाल खड़ा हो गया, जब कार्यक्रम के मुख्य पोस्टरों और होर्डिंग्स से स्थानीय सांसद रुचि वीरा की तस्वीर ही नदारद मिली। इस बात से नाराज सांसद गुट के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में जमकर हंगामा किया। विवाद इतना बढ़ गया कि खुद सांसद रुचि वीरा ने इस पूरे सम्मेलन से दूरी बना ली। लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद मुरादाबाद सपा में वर्चस्व की यह जंग अब सड़क पर आ चुकी है।
PDA सम्मेलन बना अखाड़ा, समर्थकों ने काटा जमकर हंगामा
दरअसल, मुरादाबाद में सपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में इस मंडल स्तरीय पीडीए सम्मेलन की रूपरेखा तैयार की गई थी। मकसद था कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना, लेकिन हुआ इसके उलट। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने देखा कि कार्यक्रम के मंच और आसपास लगे बड़े-बड़े पोस्टरों में मुरादाबाद की मौजूदा सांसद रुचि वीरा की फोटो ही गायब है, वैसे ही पंडाल में कानाफूसी और नाराजगी का दौर शुरू हो गया। देखते ही देखते कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सांसद समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने आयोजकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
अखिलेश चमके पर स्थानीय सांसद गायब, वर्चस्व की जंग आई सामने
मुरादाबाद सपा के भीतर गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला मौजूदा सांसद के सम्मान से जुड़ा था। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के अनुसार, सम्मेलन के पोस्टरों में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बड़े-बड़े फोटो चमकाए गए थे, लेकिन स्थानीय सांसद को जगह न मिलना किसी के गले नहीं उतर रहा था। सांसद समर्थकों का आरोप है कि पार्टी के ही कुछ स्थानीय नेता जानबूझकर रुचि वीरा को दरकिनार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी खींचतान का नतीजा रहा कि इस बड़े सम्मेलन में सांसद की कुर्सी खाली ही रह गई।
“जब न्योता ही नहीं मिला तो…” रुचि वीरा का तीखा पलटवार
इस पूरे मामले पर जब विवाद बढ़ा, तो सांसद रुचि वीरा ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और तीखा पलटवार किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने किसी नेता का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनकी बातों में कड़वाहट साफ नजर आ रही थी। रुचि वीरा ने दोटूक अंदाज में कहा, “मुझे इस कार्यक्रम के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी ही नहीं दी गई थी। जब मुझे आमंत्रण ही नहीं मिला और न ही कार्यक्रम की रूपरेखा बताई गई, तो वहां जाने का कोई मतलब ही नहीं था।”
दिल्ली से लखनऊ तक मची खलबली, क्या करेंगी रुचि वीरा?
सांसद के इस बयान के बाद मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक सपा आलाकमान के कान खड़े हो गए हैं। असल में, रुचि वीरा को अखिलेश यादव का बेहद करीबी माना जाता है, और टिकट वितरण के समय भी मुरादाबाद में भारी ड्रामा हुआ था। अब सांसद के इस तेवर से साफ है कि वह जिले की राजनीति में खुद को कमतर आंकने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।