उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक महिला बीएलओ (BLO) और उनके पति के साथ बदसलूकी का मामला अब सियासी जंग का मैदान बन चुका है। संग्रामपुर ब्लॉक के ठेंगहा गांव की घटना ने जिले में हड़कंप मचा दिया है। बीएलओ सुभद्रा मौर्य के पति राकेश मौर्य ने एसडीएम को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि बीजेपी जिलाध्यक्ष और उनके साथियों ने उनकी पत्नी को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और उनके साथ मारपीट कर मोबाइल छीन लिया।
क्या है पूरा विवाद? बीएलओ के पति की आपबीती
कांग्रेस के जिला सचिव और बीएलओ के पति राकेश मौर्य का कहना है कि गांव में बीजेपी जिलाध्यक्ष की एक बैठक थी, जिसमें उनकी पत्नी (बीएलओ) को जबरन बुलाया गया। जब राकेश अपनी पत्नी को लेकर वहां पहुंचे, तो उन्होंने वहां मौजूद अन्य बीएलओ से पूछा कि वे सरकारी कर्मचारी होकर किसी पार्टी की मीटिंग में क्यों आए हैं? आरोप है कि इसी बात पर वहां मौजूद कुछ लोग भड़क गए और हाथापाई शुरू कर दी। राकेश ने दावा किया कि जब उन्होंने वीडियो बनाने की कोशिश की, तो उनका मोबाइल छीन लिया गया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मारपीट के वक्त जिलाध्यक्ष वहां से कुछ दूरी पर मौजूद थे।
अखिलेश यादव और किशोरी लाल शर्मा ने साधा निशाना
इस घटना का प्रार्थना पत्र वायरल होते ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी जिलाध्यक्ष ने महिला बीएलओ पर PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के वोट काटने का दबाव बनाया और मनमुताबिक काम न करने पर उन्हें अपमानित किया। अखिलेश ने सरकारी काम में बाधा डालने और महिला से अभद्रता का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
वहीं, अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि यह मतदाता सूची में हेरफेर की एक गहरी साजिश है। सांसद ने आरोप लगाया कि बीएलओ पर जबरन ‘फॉर्म-7’ थमाकर खास वर्ग के नाम कटवाने का दबाव बनाया जा रहा है, जो चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का संगठित प्रयास है।
विधायक राकेश प्रताप सिंह का पलटवार: ‘सपा फैला रही झूठ’
दूसरी ओर, गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बिना सच जाने अफवाह फैलाने के जुर्म में सपा नेताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए। विधायक का दावा है कि बीएलओ का पति राकेश मौर्य कांग्रेस का पदाधिकारी है और वह अपनी पत्नी के अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहा था। जब बीजेपी जिलाध्यक्ष ने इस धांधली का पर्दाफाश किया, तो अपनी गलती छिपाने के लिए वे उन पर ही झूठे आरोप लगाने लगे। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि छवि धूमिल करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
बीजेपी जिलाध्यक्ष ने दी सफाई
बीजेपी जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि जिस समय की यह घटना बताई जा रही है, वह काफी दूर एक घर में भोजन कर रहे थे। उन्होंने सपा और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले हार के डर से ये पार्टियां झूठा नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल, एसडीएम को प्रार्थना पत्र सौंप दिया गया है और प्रशासन मामले की जांच में जुटा है।