उत्तर प्रदेश के गांवों में चुनावी बिगुल बजने का वक्त करीब आ गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर बेहद अहम और सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों (DM) और जिला निर्वाचन अधिकारियों को आदेश दिया है कि मतदाता और सीटों के डेटा में जो भी विसंगतियां (गलतियां) हैं, उन्हें तुरंत सुधारा जाए। आयोग की इस सक्रियता के बाद पूरे प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है और उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी मजबूत करनी शुरू कर दी है।
पोर्टल पर डेटा का खेल: आयोग ने पकड़ी बड़ी गलती
दरअसल, पंचायती राज विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों और चुनाव आयोग के पोर्टल पर जिलों द्वारा फीड की गई जानकारी में बड़ा अंतर पाया गया है। विशेष रूप से ग्राम पंचायत सदस्यों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की संख्या में भिन्नता मिली है। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए साफ कहा है कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए डेटा का एकदम शुद्ध होना अनिवार्य है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे परिसीमन के बाद की सूचनाओं का मिलान करें और पोर्टल पर सही विवरण दर्ज कराएं।
अप्रैल-मई में सज सकता है चुनावी मैदान
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों (ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य) को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि अप्रैल या मई 2026 में मतदान कराया जा सकता है। माना जा रहा है कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया अधिसूचना जारी होने के दो महीने के भीतर निपटा ली जाएगी। राजनीतिक दलों ने भी इस ‘मिनी असेंबली’ चुनाव के लिए अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है, क्योंकि इन चुनावों के नतीजों का असर आने वाले बड़े चुनावों पर भी पड़ता है।
पारदर्शिता पर आयोग का जोर राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को चेतावनी दी है कि सूचनाओं के सत्यापन में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डेटा की अशुद्धता न केवल चुनाव में बाधा डाल सकती है बल्कि कानूनी विवादों को भी जन्म दे सकती है। इसीलिए, चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले डिजिटल रिकॉर्ड को ‘क्लीन’ करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।