मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर मुरादाबाद जिले से आ रही है, जिसने समाजवादी पार्टी के खेमे में खलबली मचा दी है। बिलारी विधानसभा सीट से सपा विधायक मोहम्मद फहीम का पिछड़ा वर्ग (OBC) जाति प्रमाण पत्र जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली विशेष जांच समिति ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रमाण पत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद अब विधायक फहीम की विधानसभा सदस्यता पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
जांच समिति का बड़ा एक्शन, प्रमाणपत्र हुआ निरस्त
मुरादाबाद की जनपद स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने इस पूरे मामले की बारीकी से जांच और लंबी सुनवाई की। समिति ने पाया कि विधायक मोहम्मद फहीम ने जिस आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र हासिल किया था, वह तथ्यों से परे था। नियमों और मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया और विधायक का ओबीसी प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। अब चर्चा है कि अगर यह सीट आरक्षित श्रेणी या जातिगत आधार पर प्रभावित होती है, तो विधायक को अपनी कुर्सी भी गंवानी पड़ सकती है।
विधायक ही नहीं, पूरा कुनबा जांच के घेरे में
हैरानी की बात यह है कि इस फर्जीवाड़े की आंच सिर्फ विधायक फहीम तक ही सीमित नहीं है। जांच समिति ने विधायक के चाचा मोहम्मद उस्मान और उनकी दो चचेरी बहनों (उस्मान की बेटियों) के जाति प्रमाण पत्र भी रद्द कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, इन सभी ने खुद को ‘झोझा’ जाति का बताकर ओबीसी कोटे का लाभ लेने की कोशिश की थी। प्रशासन की एक ही चोट से विधायक के पूरे परिवार के जातिगत दावों की पोल खुल गई है।
आखिर क्यों फेल हुआ ‘झोझा’ जाति का दावा?
प्रशासनिक जांच में यह बात साफ हो गई है कि विधायक और उनका परिवार ‘झोझा’ जाति से ताल्लुक नहीं रखता। समिति का कहना है कि दस्तावेजी सबूत और स्थानीय जांच, विधायक के दावों का समर्थन नहीं करते। तथ्यों की पुष्टि न होने के कारण इसे धोखाधड़ी माना गया है। इस कार्रवाई के बाद मुरादाबाद की सियासत गर्मा गई है और विपक्षी दल अब सपा को घेरने में जुट गए हैं। सवाल यह है कि क्या अब बिलारी सीट पर उपचुनाव की नौबत आएगी?