ललितपुर: उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से महिला शक्ति की एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ शराब के बढ़ते जहर के खिलाफ महिलाओं ने आर-पार की जंग छेड़ दी है। जखौरा विकास खंड के ग्राम सतगता की 50 से अधिक महिलाओं ने अपने सुहाग और बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए सीधे जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पर धावा बोल दिया। मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुआ यह जोरदार हंगामा दो घंटे से अधिक समय तक चला, जिससे पूरे जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।
DM से मिलने की जिद और कलेक्ट्रेट की दहलीज पर धरना
गांव की महिलाएं सुबह-सुबह ही लामबंद होकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुँच गईं। उनकी मांग एकदम साफ और सख्त थी—गांव में चल रही देशी शराब की दुकान को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। महिलाएं इस बात पर अड़ गईं कि वे जिले के मुखिया यानी जिलाधिकारी से मिले बिना एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगी। जब मुलाकात में देरी हुई, तो गुस्साए ग्रामीण महिलाओं ने दफ्तर के मुख्य द्वार पर ही धरना शुरू कर दिया। कलेक्ट्रेट के गेट पर बैठी महिलाओं की नारेबाजी और शराब विरोधी नारों से पूरा परिसर गूँज उठा।
शराब की लत ने उजाड़े घर, बच्चों के भविष्य पर मंडराया खतरा
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि गांव में शराब की दुकान होने का सबसे घातक असर नई पीढ़ी पर पड़ रहा है। कम उम्र के लड़के भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में आसानी से शराब मिलने के कारण पुरुष दिन भर नशे में धुत रहते हैं और घर पहुँचते ही पत्नी-बच्चों के साथ मारपीट करते हैं। शराब की वजह से गांव की शांति भंग हो चुकी है और कई हंसते-खेलते परिवार बर्बादी की कगार पर पहुँच गए हैं।
आबकारी विभाग का आश्वासन: नियमों का उल्लंघन मिला तो हटेगी दुकान
हंगामा और विरोध प्रदर्शन बढ़ता देख आबकारी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे और महिलाओं को शांत करने की कोशिश की। जिला आबकारी अधिकारी विजय सिद्धांत ने महिलाओं की शिकायतों को सुना और मामले की गहन जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब की दुकानों के संचालन के लिए सरकार के कड़े नियम और मानक तय हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि यदि जांच में यह पाया गया कि दुकान किसी स्कूल, मंदिर या धार्मिक स्थल के करीब है या नियमों के खिलाफ चल रही है, तो उसे तुरंत वहां से हटा दिया जाएगा। इस ठोस आश्वासन के बाद ही महिलाओं ने अपना धरना समाप्त किया।