वृंदावन: टीम इंडिया के धाकड़ बल्लेबाज विराट कोहली और बॉलीवुड की ‘क्वीन’ अनुष्का शर्मा एक बार फिर राधा रानी की नगरी में भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। मंगलवार को यह स्टार कपल वृंदावन के प्रसिद्ध केली कुंज आश्रम पहुंचा, जहाँ उन्होंने प्रख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज का आशीर्वाद लिया। जैसे ही इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आए, वे देखते ही देखते वायरल हो गए। वीडियो में विराट और अनुष्का बेहद सादगी के साथ जमीन पर हाथ जोड़कर महाराज के सामने बैठे दिखाई दे रहे हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस साल विराट और अनुष्का की प्रेमानंद जी से यह चौथी मुलाकात है। फैंस इस जोड़े की गहरी आस्था और सादगी देखकर उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। आखिर इस मुलाकात में क्या खास रहा और इससे पहले कब-कब ‘विरुष्का’ ने महाराज के दरबार में हाजिरी लगाई, आइए विस्तार से जानते हैं।
गले में तुलसी की कंठी और गुरु दीक्षा की चर्चा
बीते 16 दिसंबर 2025 को जब विराट और अनुष्का आश्रम पहुंचे थे, तब सबकी नजरें उनके गले पर टिक गई थीं। दोनों के गले में तुलसी की माला यानी ‘कंठी’ देखी गई थी। गलियारों में चर्चा तेज है कि इस जोड़े ने संत प्रेमानंद महाराज से औपचारिक रूप से गुरु दीक्षा ले ली है, क्योंकि वैष्णव परंपरा के अनुसार गुरु दीक्षा के बाद ही कंठी धारण की जाती है। हालांकि, अभी तक आश्रम या कपल की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
उस भावुक मुलाकात के दौरान अनुष्का शर्मा ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा था, “महाराज जी, हम आपके हैं और आप हमारे।” इस पर प्रेमानंद जी ने बड़ी आत्मीयता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हम सब श्रीजी (राधा रानी) के हैं। खूब आनंद से रहो, मस्त रहो और भगवान के आश्रित रहो।” महाराज ने विराट को सलाह दी थी कि अपने खेल और काम को ही भगवान की सेवा समझें और सफलता के शिखर पर भी हमेशा विनम्र बने रहें।
टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद लिया आशीर्वाद
इससे पहले 14 मई 2025 को भी यह जोड़ा वृंदावन पहुंचा था। यह समय विराट के लिए काफी भावुक था क्योंकि उन्होंने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। उस दौरान विराट और अनुष्का ने महाराज को दंडवत प्रणाम किया और लगभग 2 घंटे 20 मिनट तक आश्रम में रुककर सत्संग का लाभ उठाया।
मुलाकात के दौरान जब अनुष्का ने जिज्ञासावश पूछा कि क्या केवल नाम जप करने से ही जीवन की सारी इच्छाएं और लक्ष्य पूरे हो सकते हैं? इस पर महाराज ने बहुत गहरा जीवन मंत्र दिया। उन्होंने कहा, “संसार में जो धन-दौलत और वैभव आपको मिल रहा है, वह असल में ईश्वर की विशेष कृपा नहीं बल्कि आपके पुराने अच्छे कर्मों (पुण्यों) का फल है। असली कृपा तो तब मानी जाती है जब आपका अंतर्मन बदल जाए। भगवान जब सच में कृपा करते हैं, तो वे जीव को संतों से मिलवाते हैं और कभी-कभी विपरीत परिस्थितियां या दुख भी देते हैं ताकि इंसान का इस नश्वर संसार से मोह छूटे और वह ईश्वर की ओर बढ़ सके।”