मुजफ्फरनगर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों जुबानी जंग तेज हो गई है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत और केंद्रीय राज्यमंत्री व रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के बीच हुई ताजा बयानबाजी ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। टिकैत ने जयंत चौधरी की सरकार में भूमिका पर एक ऐसा ‘लोकोक्ति’ वाला तंज कसा, जो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है।
“हलवाई का ततैया अपने हलवाई को नहीं काटता”
मुजफ्फरनगर में एक कार्यक्रम के दौरान नरेश टिकैत ने जयंत चौधरी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे अब सरकार का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें मजबूरी में सरकार की ही भाषा बोलनी पड़ती है। उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए जयंत की स्थिति की तुलना ‘हलवाई के ततैया’ से कर दी। टिकैत ने कहा, “जैसे हलवाई की दुकान पर बैठा ततैया अपने ही हलवाई को नहीं काटता, वैसी ही स्थिति जयंत की है।” यह बयान भारत-अमेरिका समझौते के मुद्दे पर जयंत चौधरी के रुख को लेकर सामने आया है।
जयंत चौधरी का पलटवार: “मुझे मीठे का शौक नहीं”
टिकैत के इस चुटीले तंज पर जयंत चौधरी ने भी देर नहीं की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने बिना नाम लिए लिखा, “जो हलवाई और ततैया का किस्सा सुना रहे हैं, उन्हें बता दूं कि मुझे मीठे का कोई शौक नहीं है।” जयंत का यह जवाब सीधे तौर पर टिकैत को यह बताने की कोशिश है कि वह किसी के दबाव में नहीं हैं और न ही किसी ‘हलवाई’ (सरकार) के मोहपाश में बंधे हैं।
कार्यकर्ताओं में बेचैनी और सियासी समीकरण
पश्चिमी यूपी की राजनीति में टिकैत परिवार और चौधरी चरण सिंह के परिवार का हमेशा से गहरा नाता रहा है। ऐसे में दोनों बड़े नेताओं के बीच पहली बार इस तरह की सार्वजनिक और तल्ख बयानबाजी ने भाकियू और रालोद कार्यकर्ताओं को असहज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले किसान राजनीति और क्षेत्रीय गठबंधनों के बीच यह टकराव नए सियासी समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है। क्या यह सिर्फ एक कहावत का खेल है या फिर जाट बेल्ट की राजनीति में कोई बड़ी दरार आने वाली है, यह तो वक्त ही बताएगा।