बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में बैराज रोड पर एक बेशकीमती जमीन को लेकर मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा और सपा के ही वरिष्ठ नेता डॉ. रमेश तोमर के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। गुरुवार को दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद प्रशासन को दखल देना पड़ा। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) ने मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवाकर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
ट्रस्ट की जमीन पर कब्जे का आरोप
यह पूरा विवाद मौजा फरीदपुर काजी उर्फ खेड़की में स्थित ‘सावित्री देवी ट्रस्ट’ की भूमि से जुड़ा है। ट्रस्ट के अध्यक्ष और डॉ. रमेश तोमर के पुत्र रजनीश तोमर ने सांसद रुचि वीरा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रजनीश का दावा है कि सांसद अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर चकबंदी और राजस्व विभाग की मदद से ट्रस्ट की कृषि भूमि पर अवैध कब्जा करना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद के लेटरहेड का दबाव बनाकर बिना किसी नोटिस के ट्रस्ट की दीवार गिराने और खंभे गाड़ने की कोशिश की गई।
सांसद पर ‘फर्जी नक्शे’ और बंदूक दिखाने का सनसनीखेज आरोप
रजनीश तोमर ने जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में कहा कि रुचि वीरा ने फर्जी आदेशों के आधार पर एक नक्शा तैयार करवाया और उसे ही सही बताकर पैमाइश की मांग की। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि सांसद अपने साथ कई लोगों को लेकर आईं, जो हथियारों से लैस थे। तोमर परिवार का कहना है कि जिस जमीन पर वे चैरिटेबल अस्पताल बनाना चाहते हैं, उसका मामला पहले से ही सक्षम न्यायालय (CO चकबंदी) में विचाराधीन है, ऐसे में विभाग की कोई भी कार्रवाई पूरी तरह अवैध है।
“एक इंच भी जमीन ज्यादा हो तो छोड़ देंगे” – रुचि वीरा
वहीं, मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग की टीम ने जमीन की विधिवत पैमाइश कर निशान लगाए थे और उनके लोगों ने टीम की मौजूदगी में ही खंभे गाड़े थे। सांसद ने दूसरे पक्ष पर खंभे उखाड़ने का आरोप लगाते हुए कहा, “हम केवल अपनी जमीन पर बुनियाद भरना चाह रहे हैं। अगर पैमाइश में हमारी जमीन ज्यादा निकलती है, तो हम उसे छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन दूसरा पक्ष काम में बाधा डाल रहा है।”
प्रशासन की कार्रवाई और जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर डीएम जसजीत कौर ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करवा दिया है। डीएम ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं और किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक टीम गठित की गई है, जो राजस्व और चकबंदी विभाग के रिकॉर्ड्स को खंगालकर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।