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नहीं हटेगा शरीफ नगर का बाजार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश से बच गई 18 लाख की सालाना कमाई।

On: March 1, 2026 5:51 PM
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प्रयागराज/मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के शरीफनगर गांव के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रहे संशय को खत्म करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्राम सभा की जमीन पर पुलिस चौकी बनाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। इस फैसले के बाद ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने चैन की सांस ली है और इसे अपनी एकता की जीत बताया है।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम शरीफनगर की गाटा संख्या 478 और 478एम पर पुलिस चौकी के निर्माण की चर्चाएं जोरों पर थीं। इस जमीन पर साल 2021 से एक साप्ताहिक बाजार लग रहा है। ग्रामीणों का तर्क था कि अगर यहाँ पुलिस चौकी बन जाती, तो सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी छिन जाती। इसी के खिलाफ आमिना नाजरीन बेगम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL संख्या 456/2026) दाखिल की थी।

हाईकोर्ट में हुई जोरदार पैरवी

इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद साकिर ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति महेश चन्द्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ के सामने प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश किया गया। सरकारी वकील ने कोर्ट को स्पष्ट निर्देश देते हुए बताया कि उक्त गाटा संख्या पर पुलिस चौकी निर्माण का कोई भी प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है। अदालत ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।

बाजार और ग्रामीणों की आजीविका सुरक्षित

इस आदेश के बाद अब गांव का साप्ताहिक बाजार सुरक्षित रहेगा। ग्राम प्रधान ने पहले ही प्रशासन को बताया था कि इस बाजार से ग्राम पंचायत को हर साल लगभग ₹18 लाख का राजस्व प्राप्त होता है। खास बात यह है कि पहले यह बाजार हाईवे पर लगता था, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं और जाम की समस्या बनी रहती थी। वर्तमान स्थान पर बाजार शिफ्ट होने से यातायात व्यवस्था भी सुचारू है और गांव की आय भी बढ़ी है।

कानून और एकता की जीत

अधिवक्ता मोहम्मद साकिर ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि यह निर्णय ग्राम सभा की संपत्ति और ग्रामीणों के आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर है। उन्होंने इसे पूरे गांव की एकजुटता और न्यायपालिका पर भरोसे की जीत बताया। वहीं, शरीफनगर के ग्रामीणों का कहना है कि सामूहिक प्रयास और सही कानूनी रास्ते से किसी भी हक की लड़ाई जीती जा सकती है।

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