दुनियाभर में जारी तनाव के बीच आम आदमी के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने ग्लोबल लेवल पर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) पैदा कर दिया है। इसका असर अब पूरी दुनिया में दिखने लगा है। जहां हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में तेल की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं और वहां की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं भारत में अब तक कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई थीं। लेकिन अब भारत सरकार की ओर से जो ताजा संकेत मिले हैं, उन्होंने आम जनता की धड़कनें तेज कर दी हैं।
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट ने दिए कड़े संकेत
महंगाई से जूझ रही जनता के लिए खतरे की घंटी वित्त मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट से बजी है। बीते 29 अप्रैल को वित्त मंत्रालय ने अपनी मंथली इकोनॉमिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति का कच्चा चिट्ठा पेश किया गया है। इस रिपोर्ट में मंत्रालय ने साफ तौर पर इशारा किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को अब और ज्यादा समय तक टाला नहीं जा सकता। यानी आने वाले दिनों में आपकी जेब पर पेट्रोल-डीजल का बड़ा बोझ पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।
आखिर क्यों बढ़ेंगी कीमतें?
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ आम जनता पर नहीं डाला था और तेल कंपनियों के नुकसान को खुद मैनेज किया था। लेकिन अब वैश्विक परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि इसे लंबे समय तक रोकना सरकार के लिए नामुमकिन जैसा लग रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने कच्चे तेल को महंगा कर दिया है। सरकार का मानना है कि अगर अब दाम नहीं बढ़ाए गए, तो देश की अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।