लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन व्यवस्था में पिछले कुछ सालों में जो सबसे बड़ा बदलाव दिखा है, वह है सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को एक बार फिर साफ कर दिया कि प्रदेश में अब नियुक्तियां पैसों या रसूख के दम पर नहीं, बल्कि केवल मेरिट के आधार पर हो रही हैं। लोकभवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने आयुष, व्यावसायिक शिक्षा और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के लिए चुने गए 481 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के तेवर पुराने दौर की व्यवस्था पर काफी तल्ख नजर आए। उन्होंने दो टूक कहा कि अब उत्तर प्रदेश में किसी भी नौजवान को नौकरी के लिए सिफारिश लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। दरअसल, राज्य सरकार इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिशन रोजगार” का हिस्सा मान रही है, जिसके तहत अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी सेवा का मौका दिया जा चुका है।
“भ्रष्टाचार सिस्टम को घुन की तरह खोखला कर देता है”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले नियुक्तियां जाति, मजहब और क्षेत्र देखकर होती थीं। उन्होंने कहा, “अगर किसी योग्य उम्मीदवार की जगह कोई घूसखोर सिस्टम में आ जाता, तो वह अगले 30-35 सालों तक पूरे तंत्र को घुन की तरह खोखला कर देता”। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने पहले दिन से ही भर्ती प्रक्रिया से ‘लीकेज’ और भ्रष्टाचार को खत्म करने का संकल्प लिया था।
हैरानी की बात यह है कि पिछले महज 15 दिनों के भीतर यह राज्य सरकार का चौथा बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की पारदर्शिता की तारीफ करते हुए कहा कि जवाबदेही और तकनीक के इस्तेमाल ने यूपी को देश में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाला राज्य बना दिया है।
यूपी की बदलती तस्वीर: बीमारू से ‘ग्रोथ इंजन’ तक का सफर
एक वक्त था जब उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन सीएम योगी ने आंकड़ों के जरिए बताया कि कैसे तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी का नाम सुनते ही लोग शक की निगाह से देखते थे, लेकिन आज राज्य देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और वार्षिक बजट में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है।
रोजगार के मोर्चे पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि यूपी में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र अब देश में सबसे आगे है। प्रदेश की 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में करीब 3 करोड़ लोग काम कर रहे हैं। यही नहीं, बड़े उद्योगों की संख्या भी 14,000 से बढ़कर अब 32,000 के पार पहुंच गई है, जो राज्य में औद्योगिक क्रांति का संकेत है।
आयुष और कौशल विकास से बदलेगी युवाओं की तकदीर
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि आयुष विभाग में ‘हेल्थ टूरिज्म’ को बढ़ावा देने की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने गांव-गांव में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। वहीं, व्यावसायिक शिक्षा विभाग को लेकर उन्होंने कहा कि टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर 150 आईटीआई को हाईटेक बनाया गया है। अब यूपी के युवा ड्रोन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में ट्रेनिंग ले रहे हैं।