अबुल कलाम अश्क़
मुरादाबाद (ठाकुरद्वारा): उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट’ हमेशा से ही बेहद संवेदनशील और दिलचस्प चुनावी अखाड़ा रही है। लेकिन इन दिनों इस इलाके के सियासी गलियारों से जो खबरें आ रही हैं, उसने समाजवादी पार्टी (सपा) के थिंक टैंक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ठाकुरद्वारा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता ठाकुर अजय प्रताप सिंह की मुस्लिम समाज के बीच लगातार बढ़ती सक्रियता और लोकप्रियता ने अब एक नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार इसे सपा के पारंपरिक और मजबूत मुस्लिम वोट बैंक के लिए खतरे की घंटी के रूप में देख रहे हैं।
शरीफ नगर की चौपाल में उमड़ा मुस्लिम समाज, दिखा नया समीकरण
हाल ही में ठाकुरद्वारा विधानसभा क्षेत्र के शरीफ नगर इलाके में भाजपा नेता ठाकुर अजय प्रताप सिंह के समर्थन में एक भव्य और आक्रामक चौपाल का आयोजन किया गया। यह चौपाल खास तौर पर क्षेत्र के प्रमुख मुस्लिम संभ्रांत नागरिकों जैसे मोहम्मद नफीस, मोहम्मद इरफान और मोहम्मद शोएब के आवास पर रखी गई थी।
आमतौर पर भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बनाने वाले मुस्लिम मतदाताओं ने इस चौपाल में न सिर्फ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि भाजपा नेता का गर्मजोशी से स्वागत भी किया। इस चौपाल में तासी मेंबर कामिल उस्ताद, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद फुरकान, नसीबुल्लाह, डॉक्टर शाहनवाज, मोहम्मद शोएब, इंतजार हुसैन के साथ-साथ मास्टर कपिल चौहान, ठाकुर स्वतंत्र पवार समेत सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। मुस्लिम समाज के इस रुख ने समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
मजबूत दावेदार और संगठन की जुगलबंदी ने बढ़ाई ताकत
ठाकुरद्वारा में इस बार भाजपा के भीतर चुनावी टिकट के दावेदारों को लेकर भी अच्छी-खासी हलचल और उत्साह देखने को मिल रहा है। अजय प्रताप सिंह बेहद सक्रिय, कद्दावर और जमीन से जुड़े चेहरे मौजूद हैं। जहां एक तरफ अजय प्रताप सिंह के पास क्षेत्र का लंबा चुनावी और सामाजिक अनुभव है,
यानी नेतृत्व के मोर्चे पर भाजपा के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं है। इसके साथ ही, पिछले पांच सालों में पार्टी ने बूथ स्तर पर अपने संगठन को बेहद आक्रामक और योजनाबद्ध ढंग से मजबूत किया है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भाजपा की सक्रियता पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ी है, जिसका फायदा पार्टी को मिल सकता है।
मुस्लिम ध्रुवीकरण और सपा का अभेद्य किला: राह अब भी आसान नहीं
हालांकि, जमीनी हकीकत को देखें तो भाजपा की राह जितनी आसान नजर आ रही है, उतनी है नहीं। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठाकुरद्वारा का पारंपरिक वोटिंग पैटर्न और सामाजिक ताना-बाना है। इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता हमेशा से ही ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। साल 2014 के उपचुनाव से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक समाजवादी पार्टी को इसी मुस्लिम ध्रुवीकरण का सीधा और एकतरफा फायदा मिलता आया है।
वर्तमान सपा विधायक नवाब जान यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीतकर हैट्रिक लगा चुके हैं, जिससे क्षेत्र में उनका व्यक्तिगत जनाधार और स्थानीय संगठन पर पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। ऐसे में, यदि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी मुस्लिम मतदाता पूरी तरह से एकजुट होकर सपा के पीछे लामबंद रहते हैं, तो भाजपा के लिए सपा के इस अभेद्य किले को ढहाना एक बेहद कठिन चुनौती होगी। लेकिन अजय प्रताप सिंह की ये हालिया चौपालें इस किले में दरार जरूर पैदा कर रही हैं।