उत्तर प्रदेश में रोजगार और पेपर लीक का मुद्दा लगातार सियासी पारे को हाई किए हुए है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) सुर्खियों में आ गया है। इस अनोखे ट्रेंड को लेकर कासगंज जिले की सियासत भी खासी गरमा गई है। सहावर नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष नाशी खान (Nashi Khan) ने इस पूरे मामले पर एक बेहद तीखी और मार्मिक सोशल मीडिया पोस्ट लिखकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि अगर अपने हक की आवाज उठाने वाले युवाओं को कोई ‘कॉकरोच’ कहता है, तो उन्हें भी यह नाम खुशी-खुशी कुबूल है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं को कथित तौर पर ‘परजीवी’ या ‘कॉकरोच’ कहकर ट्रोल किया जा रहा था। इसी पर पलटवार करते हुए नाशी खान ने यह पोस्ट लिखी है। उनका यह बयान अब कासगंज ही नहीं, बल्कि आस-पास के कई जिलों में भी चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि युवाओं और छात्रों के बीच उनकी इस बेबाक पोस्ट को काफी समर्थन मिल रहा है।
पेपर लीक का मुद्दा और Nashi Khan का पलटवार
आजकल जब भी कोई युवा रोजगार की बात करता है या फिर बार-बार हो रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरता है, तो उसे अक्सर भद्दी राजनीतिक बयानबाजी का शिकार होना पड़ता है। इसी दर्द को साझा करते हुए नाशी खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का जो ट्रेंड चल रहा है, उसे देखकर उन्हें हंसी भी आती है और यह सोचने पर मजबूर भी करता है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब देश का पढ़ा-लिखा युवा अपने भविष्य के लिए नौकरी मांगता है, सिस्टम से सवाल करता है, तो उसे बड़ी आसानी से ‘कॉकरोच’ या ‘परजीवी’ जैसे शब्दों से नवाज दिया जाता है।
‘विपरीत हालातों में भी जिंदा रहता है कॉकरोच’
सियासत में अक्सर शब्दों के तीर उसी पर पलट जाते हैं जो उन्हें चलाता है और नाशी खान ने भी बिल्कुल ऐसा ही किया। उन्होंने इस कथित अपमानजनक शब्द को युवाओं की ताकत के रूप में पेश किया है। अपनी पोस्ट में उन्होंने एक बेहद दिलचस्प बात लिखी है कि “याद रखिए, कॉकरोच विपरीत से विपरीत हालातों में भी जिंदा रहने की ताकत रखता है!”
असल में, यह लाइन उन लाखों युवाओं के संघर्ष को दिखाती है जो सालों तक छोटे-छोटे कमरों में रहकर सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं और फिर अचानक पेपर लीक होने की खबर उन्हें दोबारा उसी संघर्ष की आग में धकेल देती है।
सोशल मीडिया ट्रोल्स को नाशी खान का करारा जवाब
आपको याद होगा कि बीते कुछ सालों में देश की राजनीति में ‘आंदोलनजीवी’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों का खूब इस्तेमाल हुआ है। जब भी किसी वर्ग ने अपने हक के लिए आवाज उठाई, तो सोशल मीडिया ट्रोल्स ने उन्हें ऐसे ही तमगे दिए। अब उसी तर्ज पर ‘कॉकरोच’ शब्द उछाला गया है।
लेकिन सहावर नगर पालिका अध्यक्ष ने जिस तरह से इस शब्द को एक ‘सर्वाइवल’ और ‘संघर्ष’ के प्रतीक में बदल दिया है, वह राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नाशी खान की यह बेबाकी युवाओं को काफी पसंद आ रही है, क्योंकि कोई तो है जो उनके अपमान को सीधे तौर पर सम्मान में बदलने की कोशिश कर रहा है।
‘युवाओं के हक और सम्मान के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हूं’
अपनी पोस्ट के आखिर में नाशी खान ने सीधे तौर पर अपने क्षेत्र के युवाओं से कनेक्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने सहावर और कासगंज के नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि वे इस लड़ाई में बिल्कुल भी अकेले नहीं हैं। उनका कहना था, “अगर हक की आवाज उठाने वालों को लोग ‘कॉकरोच’ कह रहे हैं, तो मुझे भी यह नाम मंजूर है।” उन्होंने युवाओं को यह भरोसा दिलाया है कि वे उनके रोजगार, उनके सम्मान और उनके हक की इस कठिन लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं।
राजनीति के जानकारों की मानें तो, उत्तर प्रदेश में युवाओं की नाराजगी एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। ऐसे में स्थानीय स्तर के नेताओं का यूं खुलकर युवाओं के समर्थन में आना और ऐसे अनोखे तरीके से विरोध जताना, आने वाले समय में एक बड़े सियासी तूफान का इशारा हो सकता है। फिलहाल, नाशी खान का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और युवा इस पर जमकर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।