लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग करने वाले मौलानाओं को अपने चिर-परिचित और बेहद तीखे अंदाज में करारा जवाब दिया है। सीएम योगी ने साफ शब्दों में गौमाता के महत्व को रेखांकित करते हुए ऐसी बात कह दी है, जिससे सियासी और धार्मिक गलियारों में हलचल मच गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मांग पर कड़ा ऐतराज जताते हुए और तीखा तंज कसते हुए कहा, “गाय कोई पशु नहीं है, वह तो हमारे लिए माता है। पशु तुम्हारी बुद्धि है और तुम्हारी सोच पशुवत है, जो तुम हमारी गौमाता को पशु बोल रहे हो।” सीएम योगी यहीं नहीं रुके, उन्होंने इस तरह की मांग करने वालों की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
‘एक तरफ गोकशी को बढ़ावा, दूसरी तरफ ऐसी मांग… यह दोगलापन है’
सीएम योगी ने मौलानाओं की इस मांग को पूरी तरह से पाखंड करार दिया। उन्होंने हमलावर रुख अपनाते हुए आगे कहा, “गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करना तुम्हारा दोगलापन है। तुम एक ओर तो गोकशी (गाय काटने) को प्रश्रय यानी बढ़ावा देते हो और दूसरी ओर इस तरह की मांग करके अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हो।” मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक में बहस छिड़ गई है।
सनातन धर्म में सर्वोपरि है गौमाता का स्थान
मुख्यमंत्री के इस कड़े बयान के बाद उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से गो-संरक्षण और गो-तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियानों की चर्चा तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सीएम योगी ने हमेशा से ही गायों की सुरक्षा और उनके सम्मान को प्राथमिकता दी है। सनातन परंपरा में गाय को सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास मानकर पूजा जाता है, इसलिए उन्हें ‘पशु’ की श्रेणी में रखना करोड़ों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। योगी आदित्यनाथ के इस बयान को इसी सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है।