मुरादाबाद (ठाकुरद्वारा): उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर टिकट को लेकर घमासान कोई नई बात नहीं है, लेकिन ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर यह जंग अब खुलकर पोस्टरों पर आ गई है। मुरादाबाद में हुई हालिया ‘पीडीए (PDA) पंचायत’ में सपा सांसद रुचि वीरा की तस्वीर न होने और उन्हें न बुलाए जाने पर जो हंगामा शुरू हुआ था, उसकी तपिश अब ठाकुरद्वारा तक पहुंच गई है।
टिकट के लिए दावेदारी ठोक रहे नेताओं की आपसी खींचतान और अनुशासनहीनता ने समाजवादी पार्टी की गुटबाजी को सरेआम चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। क्षेत्र में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा सपा टिकट के दावेदार इकबाल इंजीनियर और हाल ही में पाला बदलकर समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाले मुजाहिद अली की हो रही है। लेकिन इन दोनों नेताओं के पोस्टरों से स्थानीय सांसद रुचि वीरा की तस्वीर गायब होने ने एक बहुत बड़े सियासी विवाद को जन्म दे दिया है।
सांसद रुचि वीरा से दूरी: अति-उत्साह या सोची-समझी बगावत?
ठाकुरद्वारा के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर तीखी और गर्म चर्चाएं हैं कि टिकट के इन दोनों बड़े दावेदारों के होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टरों से मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र की मौजूदा सपा सांसद रुचि वीरा की तस्वीर को पूरी तरह क्यों गायब कर दिया गया है। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का साफ मानना है कि वर्तमान सांसद को इस तरह दरकिनार करना महज कोई भूल या चूक नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपने गुट को चमकाने और पार्टी के भीतर गुटबाजी को हवा देने का प्रयास है।
“जब टिकटार्थी पार्टी के ही शीर्ष स्थानीय नेतृत्व और मौजूदा सांसद का सम्मान नहीं कर सकते, तो वे आम कार्यकर्ताओं को एकजुट कैसे रखेंगे और चुनाव कैसे जिताएंगे?” — एक स्थानीय सपा कार्यकर्ता
मुजाहिद अली, जिन्होंने अभी हाल ही में दल-बदल कर समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवारी की है,वहीं दूसरी ओर, दूसरे दावेदार इकबाल इंजीनियर पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे केवल अपने निजी गुट को चमकाने और पार्टी लाइन से पूरी तरह हटकर अपनी अलग राजनीति चमकाने में मसरूफ हैं।
अखिलेश यादव के सामने बड़ी चुनौती: क्या मौजूदा विधायक नवाब जान पर ही लगेगा दांव?
समाजवादी पार्टी की इस खुली गुटबाज़ी और अनुशासनहीनता ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने एक बड़ा राजनीतिक संकट और धर्मसंकट खड़ा कर दिया है। अब ठाकुरद्वारा की जनता और राजनीतिक पंडितों के बीच ये बड़े सवाल तैर रहे हैं:
- क्या अखिलेश यादव आगामी चुनाव में ऐसे नेताओं को टिकट थमाएंगे जो पार्टी के भीतर ही गुटबाजी और कलह को हवा दे रहे हैं?
- क्या दल-बदलुओं को तरजीह देकर सपा मुखिया अपने सालों पुराने और वफादार नेताओं व कार्यकर्ताओं को नाराज करने का आत्मघाती जोखिम उठाएंगे?
- जो नेता पोस्टर में अपनी ही लोकसभा सांसद को जगह देने से कतरा रहे हैं, क्या वे मुख्य चुनाव में पूरी पार्टी को एक मंच पर ला पाएंगे?
- या फिर इन सब विवादों से दूर, अखिलेश यादव अपने तीन बार के मौजूदा विधायक नवाब जान खान पर ही दोबारा भरोसा जताकर उन्हें मैदान में उतारेंगे?
पोस्टर पॉलिटिक्स बिगाड़ सकती है खेल
ठाकुरद्वारा सपा में चल रही यह अंदरूनी खींचतान चुनाव से ठीक पहले पार्टी के बने-बनाए समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ सकती है। इकबाल इंजीनियर और मुजाहिद अली की यह ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ लखनऊ में बैठे आलाकमान को कितनी पसंद आती है और क्या अखिलेश यादव पार्टी में अनुशासन भंग करने वालों पर दांव लगाते हैं या पुराने चेहरे को रिपीट करते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।