मुरादाबाद में एक हिंदू लड़की को बुर्का पहनाने के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन इस मामले में खुलकर उन मुस्लिम लड़कियों के बचाव में उतर आए हैं, जिन पर पुलिस ने कार्रवाई की है। हसन का दावा है कि लड़की के साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं हुई थी, बल्कि उसने भारी सामाजिक और संगठनों के दबाव में आकर अपना बयान बदला है।
“वीडियो में ज़बरदस्ती नहीं, सब मर्ज़ी से हुआ”
एस.टी. हसन ने वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती जांच और वीडियो फुटेज में कहीं भी ऐसा नहीं लग रहा कि लड़की के साथ कुछ गलत हुआ है। उन्होंने कहा, “शुरू में लड़की ने खुद स्वीकार किया था कि उसने अपनी मर्ज़ी से बुर्का पहना था। लेकिन बाद में समाज और कुछ खास संगठनों के दबाव के चलते उसे अपनी जान बचाने के लिए बयान बदलना पड़ा।” हसन का मानना है कि पांचों मुस्लिम लड़कियां और उनकी हिंदू सहेली बस हल्के-फुल्के अंदाज़ में मज़ाक कर रही थीं और लड़की की ही रिक्वेस्ट पर उसे बुर्का दिया गया था। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ब्राह्मणों के साथ अन्याय और सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
मुरादाबाद विवाद के बीच एस.टी. हसन ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे एक बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती है कि शासन-प्रशासन में ब्राह्मणों के साथ बड़ा अन्याय हो रहा है। हसन ने इस दौरान कुंभ में शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार का भी ज़िक्र किया और कहा कि जिस तरह संगम घाट पर उनके साथ बर्ताव हुआ, उससे पूरा देश दुखी है।
शंकराचार्य विवाद पर योगी सरकार को घेरा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य और अधिकारियों के बीच हुई झड़प पर बोलते हुए सपा नेता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संत होने की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि योगी जी खुद एक संत हैं, उन्हें उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेना चाहिए जिन्होंने शंकराचार्य का अपमान किया। हसन ने सुझाव दिया कि दोषी अधिकारियों को सस्पेंड किया जाना चाहिए और अगर प्रशासन अपनी गलती के लिए माफी मांग ले, तो इसमें कोई बुराई नहीं है, क्योंकि माफी मांगने से इंसान छोटा नहीं, बल्कि महान बनता है।