मुंबई: बॉलीवुड की ‘डिंपल गर्ल’ प्रीति जिंटा ने 90 और 2000 के दशक में अपनी मुस्कान और बेहतरीन अदाकारी से करोड़ों दिलों पर राज किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रीति ने अपने करियर में कुछ ऐसी फिल्में भी की थीं, जो अपने समय से बहुत आगे थीं? उस दौर में इन फिल्मों के विषयों पर समाज में बात करना भी ‘पाप’ माना जाता था। आलम यह था कि कई घरों में बच्चों को ये फिल्में देखने तक की इजाजत नहीं थी।
आइये नजर डालते हैं प्रीति जिंटा की उन फिल्मों पर जिन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी:
क्या कहना: जब ‘बिन ब्याही मां’ के रोल ने मचाया था बवाल
साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘क्या कहना’ उस समय के हिसाब से एक क्रांतिकारी फिल्म थी। इस फिल्म में प्रीति जिंटा ने एक ऐसी कॉलेज गर्ल का किरदार निभाया था, जो शादी से पहले ही गर्भवती हो जाती है। जिस दौर में ‘कुंवारी मां’ शब्द ही समाज के लिए कलंक था, उस समय प्रीति के किरदार ने बच्चे को जन्म देने का फैसला कर सबको चौंका दिया था। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे परिवार और समाज उनका तिरस्कार करता है, लेकिन अंत में उनकी हिम्मत की जीत होती है।
चोरी चोरी चुपके चुपके: सेरोगेसी पर पहली बड़ी फिल्म
सलमान खान, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा स्टारर यह फिल्म तब आई थी जब भारत में ‘सेरोगेसी’ (सरोगेसी) शब्द से लोग वाकिफ भी नहीं थे। फिल्म में प्रीति जिंटा ने एक सरोगेट मदर का किरदार निभाया था। यह विषय उस वक्त इतना विवादित और नया था कि लोग इसे परिवार के साथ देखने में हिचकिचाते थे। हालांकि, आज के दौर में जब सेरोगेसी आम हो गई है, इस फिल्म को क्लासिक माना जाता है।
सलाम नमस्ते: लिव-इन रिलेशनशिप का वो दौर
सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सलाम नमस्ते’ ने भारतीय सिनेमा में ‘लिव-इन’ कल्चर को बड़े पर्दे पर उतारा था। सैफ अली खान और प्रीति जिंटा की इस फिल्म ने उस दौर में तहलका मचा दिया था जब शादी से पहले साथ रहना केवल विदेशों की बात मानी जाती थी। इस फिल्म को भी उस समय लोगों ने छुप-छुपकर ही देखा था, क्योंकि समाज ऐसे रिश्तों को अपनाने के लिए तैयार नहीं था।