नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। मतदाता सूची में गड़बड़ी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने आज कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वोटर लिस्ट की डेडलाइन बढ़ी, अब अधिकारियों की होगी सीधी जवाबदेही
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (ECI) को राहत देते हुए मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी है। अब इसकी अंतिम तारीख 14 फरवरी से आगे बढ़ा दी गई है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजरिया की बेंच ने आदेश दिया कि इस प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारी सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को रिपोर्ट करेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित करने से पहले आयोग को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।
“यह कोर्ट है या बाजार?”: वकील की दलील पर भड़के चीफ जस्टिस
सुनवाई के दौरान अदालत में उस वक्त तनाव बढ़ गया जब कई वकील एक साथ बोलने लगे। वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी के हस्तक्षेप पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “अनुशासन बनाए रखें, यह कोई बाजार नहीं है। अगर मर्यादा नहीं रखी गई, तो आपको चीफ जस्टिस का स्वभाव पता होना चाहिए।” कोर्ट ने वकीलों को बारी-बारी से अपनी बात रखने और अदालती गरिमा का सम्मान करने की नसीहत दी।
बंगाल डीजीपी को नोटिस: फॉर्म जलाने और कानून-व्यवस्था पर मांगा जवाब
चुनाव आयोग ने कोर्ट में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। आयोग के मुताबिक, बंगाल में कुछ असामाजिक तत्वों ने निर्वाचन आयोग के नोटिस और ‘फॉर्म 7’ (आपत्ति फॉर्म) तक जला डाले हैं। इस पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा कि अभी तक इन बदमाशों के खिलाफ FIR दर्ज क्यों नहीं की गई और पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल क्यों रही?
70 लाख नामों में गड़बड़ी और अधिकारियों की तैनाती का पेच
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि क्या ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में वाकई 70 लाख मतदाताओं के नाम की स्पेलिंग गलत है? वहीं, मैनपावर की कमी को लेकर भी बहस हुई। बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार ने 8,505 ग्रुप-B अधिकारियों की लिस्ट आयोग को सौंप दी है। हालांकि, आयोग के वकील का कहना था कि उन्हें अभी तक नामों का विवरण नहीं मिला है। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जोर देकर कहा कि संविधान सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है और आयोग की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।