लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की बिसात बिछ चुकी है। चुनावी रण में उतरने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के 10वें बजट के जरिए हर वर्ग को साधने का मास्टरप्लान तैयार किया है। बुधवार को विधानसभा में पेश होने वाले इस महा-बजट में न केवल विकास की बड़ी योजनाएं हैं, बल्कि आम जनता की जेब में सीधा पैसा पहुँचाने का खाका भी तैयार किया गया है। बजट का मुख्य फोकस युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों पर है, जिनके लिए सरकार ने अपना खजाना पूरी तरह खोल दिया है।
अपराध पर अंतिम प्रहार: 45 हजार करोड़ का ‘हाईटेक’ पुलिस बजट
योगी सरकार का मानना है कि ‘सुरक्षित उत्तर प्रदेश’ ही ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की नींव है। अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को अगले स्तर पर ले जाने के लिए इस बार पुलिस महकमे को अब तक का सबसे बड़ा फंड मिलने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और पुलिस बल को हाईटेक उपकरणों से लैस करने के लिए 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन प्रस्तावित है। इसका सीधा मकसद प्रदेश के हर कोने में कानून का इकबाल बुलंद करना है।
पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले: अब हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये
इस बजट का सबसे बड़ा और इमोशनल कार्ड सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी है। चुनावी साल की नब्ज पहचानते हुए सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। अब तक मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक पेंशन को बढ़ाकर 1,500 रुपये किया जा सकता है। इस 500 रुपये की बढ़ोतरी से प्रदेश के लाखों परिवारों को महंगाई के दौर में बड़ी आर्थिक मजबूती मिलेगी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा पेश होने वाले इस करीब 9 लाख करोड़ के बजट में लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये सिर्फ नए विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे।
बुनियादी सुविधाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर
केवल चुनावी सौगातें ही नहीं, बल्कि योगी सरकार का यह बजट यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर बदलने वाला भी होगा। सड़कों के जाल से लेकर बिजली और पानी की सुविधाओं को ‘चकाचक’ करने के लिए भारी निवेश का एलान होने वाला है। सरकार का लक्ष्य साफ है—अगले चुनाव से पहले जनता को यह दिखाना कि विकास की गति न थमी है और न थमेगी।