नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा होती है। जिंदगी भर की भागदौड़ के बाद जब हर महीने एक तय रकम खाते में आती है, तो सुकून मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पेंशन को आप अपनी पूरी जमापूंजी मान रहे हैं, उस पर इनकम टैक्स विभाग की भी पैनी नजर होती है? अक्सर लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि पेंशन पर टैक्स लगता है या नहीं।
चाहे आप सरकारी कर्मचारी हों या प्राइवेट सेक्टर में काम करते हों, टैक्स के नियम सबके लिए एक जैसे नहीं हैं। शहीद के परिवारों को मिलने वाली पेंशन से लेकर सामान्य फैमिली पेंशन तक, आयकर विभाग (Income Tax Department) ने हर किसी के लिए अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं। अगर आप भी अपनी पेंशन को लेकर उलझन में हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है।
पेंशन पर टैक्स का खेल: क्या पूरी रकम होती है टैक्स-फ्री?
सबसे पहले यह गांठ बांध लीजिए कि पेंशन पूरी तरह से टैक्स-फ्री नहीं होती। आप पर टैक्स की देनदारी बनेगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको पेंशन किस रूप में मिल रही है। इनकम टैक्स की दुनिया में मासिक पेंशन, एकमुश्त मिलने वाली रकम और फैमिली पेंशन के कायदे बिल्कुल जुदा हैं। कहीं आपको बड़ी राहत मिलती है, तो कहीं टैक्स देना अनिवार्य हो जाता है।
हर महीने आने वाली पेंशन (Uncommuted Pension)
जो पेंशन आपको हर महीने सैलरी की तरह मिलती है, उसे तकनीकी भाषा में ‘अनकम्यूटेड पेंशन’ कहा जाता है। आयकर नियमों के अनुसार, इसे आपकी ‘सैलरी’ ही माना जाता है। इसलिए जब आप ITR फाइल करते हैं, तो इसे ‘Income from Salary’ हेड के तहत ही दिखाना होता है। अगर आपकी कुल सालाना कमाई (पेंशन मिलाकर) टैक्स स्लैब की सीमा से ऊपर जाती है, तो आपको नियमानुसार टैक्स चुकाना होगा। हालांकि, सशस्त्र बलों के उन जवानों के लिए बड़ी राहत है जो शारीरिक विकलांगता की वजह से रिटायर हुए हैं; उनकी विकलांगता पेंशन पूरी तरह से टैक्स-मुक्त है।
एकमुश्त मिलने वाली मोटी रकम (Commuted Pension)
रिटायरमेंट के समय कई लोग अपनी मासिक पेंशन का एक हिस्सा सरेंडर कर देते हैं और उसके बदले में एक बड़ी एकमुश्त रकम ले लेते हैं। इसे ‘कम्यूटेड पेंशन’ कहते हैं। यहाँ सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों के लिए नियम बदल जाते हैं।
अगर आप केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय या रक्षा सेवाओं से रिटायर हुए हैं, तो यह एकमुश्त रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री है। यानी इस मोटी रकम पर सरकार एक रुपया भी नहीं काटेगी। वहीं, प्राइवेट कर्मचारियों के लिए मामला थोड़ा पेचीदा है। अगर आपको ग्रेच्युटी मिली है, तो इस एकमुश्त रकम का सिर्फ एक-तिहाई हिस्सा टैक्स-फ्री होगा। वहीं, ग्रेच्युटी न मिलने की स्थिति में 50% हिस्से तक टैक्स छूट मिल सकती है।
फैमिली पेंशन: क्या परिवार की आय पर भी कटेगा टैक्स?
कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके जीवनसाथी या आश्रितों को जो पेंशन मिलती है, उसे ‘फैमिली पेंशन’ कहा जाता है। इसे सैलरी नहीं, बल्कि ‘Income from Other Sources’ (अन्य स्रोतों से आय) माना जाता है। यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि शहीद सैनिकों के परिवारों को मिलने वाली पेंशन पूरी तरह टैक्स-मुक्त होती है।
सामान्य मामलों में, पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत पेंशन का एक-तिहाई हिस्सा या 15,000 रुपये (दोनों में से जो कम हो) की छूट मिलती है। वहीं, नई टैक्स व्यवस्था में कुछ स्थितियों में यह राहत बढ़कर 25,000 रुपये तक हो सकती है।
बुजुर्गों के लिए विशेष छूट और ITR में सावधानी
इनकम टैक्स विभाग वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को कुछ खास फायदे भी देता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में उनके लिए बेसिक छूट की सीमा अधिक होती है। इसके अलावा, बैंक FD या बचत खाते से मिलने वाले ब्याज पर भी उन्हें खास छूट मिलती है, जिससे उनकी कुल टैक्स देनदारी काफी कम हो जाती है।
रिटर्न दाखिल करते समय पेंशनर्स को कैटेगरी का बहुत ध्यान रखना चाहिए। मासिक पेंशन को ‘Salary’ और फैमिली पेंशन को ‘Other Sources’ में ही दिखाएं। रिटर्न भरने से पहले फॉर्म 26AS से कटे हुए TDS का मिलान जरूर कर लें और यह जांचें कि आपके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था फायदेमंद है या नई।