Anupshahr Kawad Yatra News: उत्तर प्रदेश के अनूपशहर की सड़कों पर शनिवार रात जिसने भी यह नजारा देखा, वह अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाया। केसरिया रंग के सैलाब के बीच एक 25 वर्षीय महिला बुर्का पहनकर कंधे पर सजी-धजी कांवड़ लिए “बम-बम भोले” के जयकारे लगाती दिखी। यह कहानी है उसमा की, जो सांप्रदायिक सौहार्द और व्यक्तिगत आस्था की एक ऐसी मिसाल पेश कर रही हैं, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।
श्रद्धा और भक्ति का अनोखा सफर
गौतमबुद्ध नगर के रबूपुरा की रहने वाली उसमा करीब 100 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा पर निकली हैं। उनके अटूट विश्वास का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके साथ उनके 40 वर्षीय लिव-इन पार्टनर लोकेंद्र मीणा भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। जब यह जत्था अनूपशहर की सीमाओं से गुजरा, तो राहगीर अपनी जगह ठिठक गए। देखते ही देखते लोगों ने अपने मोबाइल निकाल लिए और इस अनोखे दृश्य को कैमरे में कैद करने लगे। सोशल मीडिया पर अब उसमा और लोकेंद्र की यह यात्रा तेजी से वायरल हो रही है।
मन्नत पूरी होने पर उठाया कांवड़
उसमा का स्पष्ट कहना है कि यह उनकी व्यक्तिगत आस्था का मामला है और वे अपनी मर्जी से भगवान शिव की सेवा में जुटी हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि उनके जत्थे में रबूपुरा के करीब 15-20 अन्य श्रद्धालु भी शामिल हैं। सभी भक्त गंगाजल लेकर शिवालय में जलाभिषेक करने की तैयारी में हैं। लोकेंद्र मीणा ने साझा किया कि वे दोनों पिछले चार साल से लिव-इन रिलेशनशिप में हैं। उन्होंने एक साथ सुखद जीवन बिताने की मन्नत मांगी थी, और जब उनकी दुआ कबूल हुई, तो उन्होंने भोलेनाथ के द्वार पर कांवड़ चढ़ाने का संकल्प पूरा करने का फैसला किया।
अनोखा परिवार और समाज का बदलता नजरिया
लोकेंद्र और उसमा के दो छोटे बच्चे भी हैं, जो इस सफर की गवाह बन रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि लोकेंद्र की पहले भी शादी हो चुकी है और उनकी पहली पत्नी से पांच बेटियां हैं जो गांव में रहती हैं। लोकेंद्र का दावा है कि उनके परिवार में किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है और सभी सदस्य मिल-जुलकर रहते हैं। इस घटना को लेकर इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहाँ कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता और प्यार की जीत बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे समाज के बदलते स्वरूप के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल, यह जोड़ा हर आलोचना से दूर अपनी मंजिल की ओर पूरी श्रद्धा के साथ बढ़ रहा है।