नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के ‘घर वापसी’ वाले बयान ने देश की सियासत में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। इस बयान पर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। मदनी ने भागवत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे देश की अखंडता के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सांस है, वह नफरत फैलाने वाली इस विचारधारा का विरोध करते रहेंगे।
20 करोड़ मुस्लिमों की घर वापसी का दावा देश के लिए खतरनाक
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी भड़ास निकालते हुए मौलाना मदनी ने मोहन भागवत को सीधे निशाने पर लिया। मदनी ने हैरानी जताते हुए कहा कि जो बातें पिछले 70 सालों में किसी ने कहने की हिम्मत नहीं की, आज वो सरेआम कही जा रही हैं। उन्होंने भागवत के बयान को उकसाने वाला बताते हुए तंज कसा कि ऐसा लगता है मानो इन लोगों ने ही अपनी मां का दूध पिया है और किसी ने नहीं। मदनी ने चेतावनी दी कि जो आवाज देश को तबाही और आपसी दुश्मनी की ओर धकेल दे, वह कभी देशभक्ति की आवाज नहीं हो सकती।
लिंचिंग और नफरत के माहौल पर उठाए तीखे सवाल
देश के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए मौलाना मदनी ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाय के नाम पर सरेआम बेगुनाह लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार ने इस पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। मदनी ने कड़े शब्दों में कहा कि किसी एक खास विचारधारा को पूरे देश पर थोपने की कोशिश करना भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है। उनके अनुसार, यह सोच भारत की शांति और भाईचारे के लिए सबसे बड़ा कांटा है।
‘मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम आज भी जिंदा है’
अपने बयान के आखिरी हिस्से में मौलाना मदनी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने ललकारते हुए कहा कि मजहब के नाम पर हिंसा करने वाले कभी अपने धर्म के सच्चे सिपाही नहीं हो सकते। मदनी ने कड़े लहजे में कहा कि जो लोग मुसलमानों को मिटाने का ख्वाब देख रहे हैं, वे खुद इतिहास के पन्नों में दफन हो गए, लेकिन इस्लाम कल भी जिंदा था और कयामत तक जिंदा रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में अमन-चैन सिर्फ एक धर्मनिरपेक्ष संविधान के जरिए ही मुमकिन है।