प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवा में रहते हुए निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों के लिए अब मुसीबत खड़ी होने वाली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और नियमों का उल्लंघन अब स्वीकार्य नहीं होगा। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि जो डॉक्टर ड्यूटी के समय निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं, उन पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए।
सादी वर्दी में खुफिया निगरानी और रंगे हाथ पकड़ने की तैयारी
हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब प्रशासन ‘खुफिया निगरानी’ के जरिए डॉक्टरों पर शिकंजा कसेगा। अब सामान्य चेकिंग के बजाय सादी वर्दी में टीमें निजी क्लीनिकों का चक्कर लगाएंगी ताकि डॉक्टरों को रंगे हाथ पकड़ा जा सके। यदि कोई सरकारी डॉक्टर दोषी पाया जाता है, तो न केवल उसकी नौकरी जा सकती है, बल्कि उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी।
DM ने बनाई विशेष कमेटी, शुरू होगी छापेमारी
कोर्ट के आदेशों को अमलीजामा पहनाने के लिए जिलाधिकारियों ने विशेष कमेटियों का गठन कर दिया है। ये कमेटियां न केवल शिकायतों की जांच करेंगी, बल्कि निजी क्लीनिकों पर अचानक छापेमारी (Surprise Raid) भी करेंगी। प्रशासन का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।