लखनऊ के राजभवन में रविवार दोपहर 3:30 बजे हुए एक भव्य समारोह में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार (Yogi Cabinet Expansion) संपन्न हुआ। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक एक साल पहले हुए इस फेरबदल में सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को विशेष महत्व दिया गया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इन दिग्गजों की हुई कैबिनेट में एंट्री
इस विस्तार में कुल 6 नए चेहरों को जगह मिली है, जिनमें से भूपेंद्र सिंह चौधरी और मनोज कुमार पांडेय ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली:
- भूपेंद्र सिंह चौधरी: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी यूपी के कद्दावर जाट नेता की कैबिनेट में धमाकेदार वापसी हुई है।
- मनोज कुमार पांडेय: समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रायबरेली के कद्दावर ब्राह्मण नेता मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर भाजपा ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।
- कृष्णा पासवान: फतेहपुर से आने वाली वरिष्ठ दलित नेता को मंत्री बनाकर पासी समुदाय को साधने की कोशिश की गई है।
- सुरेंद्र दिलेर: हाथरस/अलीगढ़ क्षेत्र के प्रमुख वाल्मीकि नेता को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।
- हंसराज विश्वकर्मा: वाराणसी से आने वाले ओबीसी नेता और एमएलसी को मंत्री बनाया गया है।
- कैलाश राजपूत: कन्नौज क्षेत्र के लोध समुदाय के कद्दावर नेता को भी टीम योगी में शामिल किया गया है।
राज्यमंत्रियों का हुआ प्रमोशन
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो पुराने भरोसेमंद राज्यमंत्रियों का कद भी बढ़ाया है:
- अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को उनके बेहतर कामकाज का ईनाम देते हुए राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पदोन्नत किया गया है। सोमेंद्र तोमर को पश्चिमी यूपी में युवाओं और गुर्जर समाज के बीच मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता है।
2027 के लिए ‘जातीय संतुलन’ का मास्टरस्ट्रोक
इस विस्तार के जरिए भाजपा ने जाट, ब्राह्मण, दलित (पासी और वाल्मीकि), लोध और ओबीसी (विश्वकर्मा) समुदायों को एक साथ साधने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश के इस ‘मिनी विस्तार’ ने साफ कर दिया है कि भाजपा 2027 की चुनावी पिच पर पूरी तरह से तैयार होकर उतरना चाहती है।