लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की मुहिम को एक नई रफ्तार मिलने जा रही है। योगी सरकार के महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ (Jal Jeevan Mission 2.0) के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने खजाना खोल दिया है। इस बार केवल पानी पहुंचाना ही नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता और जल स्रोतों के संरक्षण पर भी सरकार का विशेष जोर है। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय पेयजल विभाग के बीच इस संबंध में एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं।
₹28,000 करोड़ का बजट और नई डेडलाइन
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए करीब 13,425 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जिसमें प्रदेश सरकार भी अपना 15,000 करोड़ रुपये का हिस्सा मिलाएगी। यानी कुल ₹28,000 करोड़ से अधिक की राशि ग्रामीण जलापूर्ति पर खर्च की जाएगी। खास बात यह है कि मिशन की डेडलाइन को अब बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया गया है, ताकि हर घर तक गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंच सके।
बुंदेलखंड और विंध्य पर विशेष फोकस
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत बुंदेलखंड और विंध्य जैसे इलाकों में पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- रसायनिक जांच: पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों की जांच के लिए आधुनिक लैब स्थापित की जाएंगी ताकि पानी पूरी तरह पीने योग्य हो।
- गांवों को जिम्मेदारी: अब पंप हाउस और पानी की टंकियों का रखरखाव केवल विभाग के भरोसे नहीं रहेगा। गांवों की स्थानीय समितियों को इनकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो अगले 10 सालों तक संचालन और रखरखाव का काम देखेंगी।
लक्ष्य के करीब योगी सरकार
आंकड़ों की बात करें तो उत्तर प्रदेश अब तक 2.43 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन दे चुका है। सरकार का लक्ष्य कुल 2.62 करोड़ परिवारों को इस योजना के दायरे में लाना है। 2026-27 तक इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करने की तैयारी है, जबकि 2027 में केंद्र सरकार इस मिशन की प्रगति की समीक्षा करेगी।