लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। योगी आदित्यनाथ सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चारों तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है। लेकिन इसी गहमागहमी के बीच बीजेपी विधायक आशा मौर्य के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी पार्टी में खलबली मचा दी है। पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि आशा मौर्य को नई कैबिनेट में जगह मिल सकती है, लेकिन उनके ताज़ा पोस्ट ने कुछ और ही कहानी बयां कर दी है। उनके शब्दों में मंत्री न बन पाने की टीस अब खुलकर सामने आ गई है।
35 साल की निष्ठा और फिर ये ‘पीड़ा’
आशा मौर्य ने फेसबुक पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए एक भावुक संदेश लिखा। उन्होंने बताया कि पिछले 35 वर्षों से वे पार्टी और संगठन के लिए पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने हमेशा संगठन के हित को सबसे ऊपर रखा और जनसेवा को ही अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य माना। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार करने में गुरेज नहीं किया कि एक समर्पित कार्यकर्ता होने के नाते उनके मन में थोड़ी ‘पीड़ा’ जरूर है। उन्होंने लिखा कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष हर कार्यकर्ता के लिए एक भावनात्मक मुद्दा होता है, लेकिन यह दर्द उनके संकल्प को कमजोर करने के बजाय उन्हें समाज के प्रति और अधिक मजबूत बनाएगा।
समर्थकों और पत्रकारों का जताया आभार
सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए विधायक ने कहा कि उन्हें देश और प्रदेश भर से पत्रकारों और शुभचिंतकों के लगातार फोन आ रहे हैं। उन्होंने उन सभी लोगों का दिल से धन्यवाद किया जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें शुभकामनाएं और समर्थन दिया। आशा मौर्य का कहना है कि जनता का यही प्यार और विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जो उन्हें समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ने की निरंतर प्रेरणा देता है।
क्या वाकई नाराज हैं आशा मौर्य?
जब इस पोस्ट को लेकर विवाद बढ़ा और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हुईं, तो एक निजी न्यूज़ चैनल से बातचीत में आशा मौर्य के सुर थोड़े बदले हुए नजर आए। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वे नाराज नहीं हैं, बस थोड़ी व्यस्त हैं। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी एक परिवार की तरह होती है और परिवार में कभी-कभी गुस्सा आ जाना स्वाभाविक है। अपनी किस्मत पर बात टालते हुए उन्होंने कहा कि शायद उनसे ज्यादा योग्य लोग होंगे जिन्हें मौका मिला, और संगठन जो भी फैसला करता है, वह सही ही होता है।
पोस्ट बदलकर किया डैमेज कंट्रोल
सूत्रों के हवाले से खबर है कि आशा मौर्य ने पहले जो पोस्ट लिखी थी, वह काफी आक्रामक थी। उस विवादित पोस्ट में उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए लिखा था कि बीजेपी को अब संघर्षशील लोगों की जरूरत नहीं है, बल्कि बागी और दलबदलू नेताओं को तवज्जो दी जा रही है। बताया जा रहा है कि हाईकमान की फटकार और अनुशासन के डर से उन्होंने आनन-फानन में उस पोस्ट को डिलीट किया और उसकी जगह एक ‘सॉफ्ट’ पोस्ट डाला। इस पूरे घटनाक्रम ने यूपी की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई बीजेपी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं?