मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में चकबंदी विभाग के एक कार्यालय से बेहद शर्मनाक और गंभीर मामला सामने आया है। यहां तैनात कानूनगो होशियार सिंह पर अपनी ही सहकर्मी चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी का आरोप लगा है। आरोपी नशे की हालत में इतना मदहोश था कि उसने कार्यालय में मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दीं। यह घटना न केवल विभाग के लिए बल्कि पूरे सरकारी तंत्र के लिए कलंक साबित हो रही है।
घटना का विवरण और आरोपी की दबंगई
मामला ठाकुरद्वारा चकबंदी कार्यालय का है। आरोप है कि कानूनगो होशियार सिंह शराब के नशे में धुत होकर कार्यालय पहुंचे और वहां मौजूद महिला कर्मचारी के साथ अश्लील व्यवहार शुरू कर दिया। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसके सामने अनुचित और गंदी मांगें रखीं। जब महिला ने इसका विरोध किया और शोर मचाया, तो होशियार सिंह भड़क उठे। उन्होंने न केवल महिला को भद्दी-भद्दी गालियां दीं, बल्कि जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया। हद तो तब हो गई जब मीडिया कैमरों के सामने भी आरोपी ने बेशर्मी दिखाते हुए कहा, “डार्लिंग ही तो कहा था, और क्या कहा?”
घटना के बाद हंगामा मच गया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया, लेकिन उनकी अकड़ कम नहीं हुई। हिरासत में भी उन्होंने पीड़िता को मामला दबाने के लिए लाखों रुपये का लालच दिया। इतना ही नहीं, अपनी जाति का रौब झाड़ते हुए कहा, “मैं ठाकुर हूं, कोई आम आदमी नहीं!” पुलिस की मौजूदगी में भी उन्होंने महिला के साथ दोबारा गाली-गलौज की, जिससे मौके पर तनाव और बढ़ गया। यह व्यवहार न केवल महिला सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी दफ्तरों में काम करने वाली महिलाएं कब तक सुरक्षित रहेंगी?
मेडिकल पुष्टि और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद चकबंदी विभाग में हड़कंप मच गया। एसडीएम के सख्त रुख के बाद आरोपी कानूनगो का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उनके पूरी तरह शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। पीड़िता ने कोतवाली पहुंचकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। कोतवाली प्रभारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया है और आश्वासन दिया कि कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही है। जहां एक तरफ सरकार महिला सशक्तिकरण और सुरक्षित कार्यस्थल की बात करती है, वहीं ऐसे मामले सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खुल रही है। विभागीय स्तर पर आरोपी के खिलाफ निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने और जांच आगे बढ़ने की प्रक्रिया चल रही है।
समाज और प्रशासन से अपील है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त न्याय हो, ताकि महिलाएं बिना डर के काम कर सकें। यह घटना एक चेतावनी है कि नशा और दबंगई सरकारी दफ्तरों में कितनी गहराई तक घुस चुकी है। उम्मीद है कि इस मामले में न्याय होगा और दोषी को कड़ी सजा मिलेगी।