दिल्ली : नई दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। उन्नाव दुष्कर्म मामले के मुख्य दोषी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जबरदस्त झटका लगा है। अदालत ने सेंगर की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी 10 साल की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। यह सजा पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से संबंधित है, जिसमें सेंगर को कोर्ट ने दोषी करार दिया था। इस फैसले के बाद अब सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
अदालत में नहीं चली सेंगर की दलीलें
सुनवाई के दौरान कुलदीप सिंह सेंगर के वकीलों ने उन्हें जेल से बाहर निकालने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। कोर्ट में तर्क दिया गया कि सेंगर इस मामले में पहले ही लगभग 9 साल की जेल काट चुके हैं और अब उनकी सजा के केवल 11 महीने ही बाकी बचे हैं। इसी आधार पर सजा पर रोक लगाकर राहत देने की अपील की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और साफ कर दिया कि सजा पर रोक लगाने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
पीड़िता की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता
सेंगर की रिहाई की कोशिशों का पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुलदीप सेंगर एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और अगर उन्हें जेल से बाहर आने की अनुमति दी जाती है, तो पीड़िता और उसके पूरे परिवार की जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। वकील ने जोर देकर कहा कि केस की संवेदनशीलता और गवाहों की सुरक्षा को देखते हुए किसी भी तरह की ढील देना खतरनाक होगा। कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लिया और सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया।