मायानगरी मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आज शनिवार का दिन महंगाई की एक और बुरी खबर लेकर आया है। अगर आप भी मुंबई में गाड़ी चलाते हैं या आपके घर में पाइप वाली रसोई गैस आती है, तो अब आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। मुंबई में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और पाइप वाली रसोई गैस (PNG) की कीमतों में एक बार फिर बड़ा इजाफा हो गया है।
महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने आम जनता को झटका देते हुए शनिवार, 30 मई से सीएनजी की खुदरा बिक्री कीमत में सीधे 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही, घरेलू पाइप वाली नेचुरल गैस यानी पीएनजी के दाम भी 50 पैसे प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) बढ़ा दिए गए हैं। ईंधन की ये नई बढ़ी हुई दरें शुक्रवार और शनिवार की आधी रात से ही पूरे मुंबई क्षेत्र में लागू हो चुकी हैं।
इस नए बदलाव के बाद अब मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और इसके आसपास के तमाम इलाकों में सीएनजी की कीमत 84 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर सीधे 86 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ, घरों में सप्लाई होने वाली घरेलू पीएनजी की नई कीमत अब 52 रुपये प्रति एससीएम (SCM) हो गई है। कीमतों में अचानक की गई इस बढ़ोतरी को लेकर महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और अन्य कारणों से गैस खरीदने की कुल लागत में अचानक आई भारी तेज़ी की वजह से उन्हें न चाहते हुए भी कीमतों में यह संशोधन करना पड़ा है।
मुंबई के 12 लाख वाहनों और 31 लाख रसोई घरों पर पड़ेगा सीधा असर
महानगर गैस लिमिटेड द्वारा की गई इस मूल्य वृद्धि का बहुत बड़ा और सीधा असर मुंबई की रफ्तार पर पड़ने वाला है। आंकड़ों की मानें तो इस बढ़ोतरी से मुंबई और आसपास के करीब 12 लाख सीएनजी वाहनों के मालिकों को तगड़ा झटका लगा है, जिनमें सड़क पर दौड़ने वाले करीब 2.80 लाख ऑटो रिक्शा भी शामिल हैं। इसके अलावा, करीब 31 लाख ऐसे घर भी इस महंगाई की जद में आ गए हैं, जिनके रसोई घरों में पीएनजी का कनेक्शन इस्तेमाल होता है।
सीएनजी के दाम बढ़ने से मुंबई के दैनिक यात्रियों (डेली कम्यूटर्स) का एक बहुत बड़ा वर्ग सीधे तौर पर प्रभावित होने जा रहा है, क्योंकि मुंबई की लाइफलाइन माने जाने वाले ऑटो रिक्शा, काली-पीली टैक्सी और बेस्ट (BEST) की बसें काफी हद तक इसी ईंधन पर निर्भर हैं। ऐसे में ईंधन महंगा होने से यात्रियों और वाहन मालिकों दोनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना बिल्कुल तय है।
ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने उठाई किराया बढ़ाने की मांग, यात्रियों की बढ़ेगी टेंशन
सीएनजी की कीमतें आसमान छूने के बाद अब मुंबई के ऑटो और टैक्सी चालकों की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। इस जेब ढीली करने वाली महंगाई के विरोध में और अपनी कमाई को बचाने के लिए ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने सरकार से किराया बढ़ाने की मांग पुरजोर तरीके से उठा दी है। मुंबई रिक्शा मेन्स यूनियन के प्रमुख नेता थम्पी कुरियन ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किराया बढ़ाना अब बेहद जरूरी हो गया है। उनका कहना है कि सरकारी किराए के मौजूदा फॉर्मूले के हिसाब से देखें तो अब बेस किराए में करीब 1.12 रुपये प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी तुरंत की जानी चाहिए।
उन्होंने आगे यह भी बताया कि किराया वृद्धि का यह आधिकारिक प्रस्ताव जल्द ही परिवहन विभाग के माध्यम से मुंबई रिक्शा चालक संघ (MMRTA) को भेजा जाएगा, जो मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराए में किसी भी तरह के बदलाव या वृद्धि पर अंतिम मुहर लगाता है। सिर्फ ऑटो ही नहीं, बल्कि टैक्सी यूनियनों ने भी सीएनजी की मार से बचने के लिए बेस किराये में 2 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी करने की मांग सरकार के सामने रख दी है। यूनियनों का साफ कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन की कीमतों के कारण गरीब ड्राइवरों की रोजाना की कमाई पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
हालांकि, इस सब के बीच एक राहत की बात यह भी है कि इतनी बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद सीएनजी अब भी पेट्रोल और डीजल के मुकाबले काफी सस्ता और किफायती ईंधन बना हुआ है। वर्तमान में मुंबई के बाजार में सीएनजी का इस्तेमाल करने से पेट्रोल की तुलना में करीब 45 फीसदी और डीजल की तुलना में करीब 12 फीसदी तक की बड़ी बचत वाहन मालिकों को होती है।
मई के महीने में ही दूसरी बार जेब पर डाका, जानिए क्यों महंगी हो रही है गैस
मुंबईकरों के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि चालू मई के महीने में यह दूसरी बार है जब सीएनजी की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की किया गया है। इससे पहले बीते 13 मई को भी सीएनजी के दामों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम का तगड़ा इजाफा किया गया था। केवल मई ही नहीं, इससे ठीक पहले अप्रैल के महीने में भी सीएनजी के दाम 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए थे। यानी पिछले दो महीनों में ही जनता को बैक-टू-बैक कई झटके लग चुके हैं।
गैस कंपनियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन) में चल रही भू-राजनीतिक बाधाओं, बेहद महंगे विदेशी गैस स्रोतों पर भारतीय कंपनियों की लगातार बढ़ती निर्भरता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में देखी जा रही कमजोरी के कारण गैस खरीदने की कुल लागत (गैस प्रोक्योरमेंट कॉस्ट) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कंपनी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे इसी वित्तीय नुकसान की भरपाई करने के लिए उन्हें घरेलू बाजार में कीमतों में यह बड़ा बदलाव करना पड़ा है।