लुधियाना के फील्ड गंज चौक स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद समेत शहर की तमाम मस्जिदों में ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज अकीदत और पूरे उत्साह के साथ अदा की गई। इस पावन मौके पर लाखों की संख्या में मुस्लिम भाइयों ने देश में अमन, चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। लेकिन त्योहार के इस जश्न के बीच पंजाब के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने देश के सियासी और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
शाही इमाम ने देश के कुछ राज्यों में सड़क पर नमाज अदा करने पर लगाई जा रही पाबंदियों पर गहरा अफसोस जताया है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर देश की धर्मनिरपेक्ष छवि और संवैधानिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। त्योहार की मुबारकबाद देने पहुंचे विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के नेताओं की मौजूदगी में शाही इमाम ने दोटूक कहा कि कानून और नियम देश के सभी नागरिकों और धर्मों के लिए एक समान होने चाहिए।
‘ताकत के बल पर रोकना और पीठ थपथपाना लोकतंत्र के खिलाफ’
दरअसल, जामा मस्जिद में जुटे जनसैलाब को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब ने किसी राज्य का नाम लिए बिना सरकारों की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों से ऐसी खबरें आ रही हैं जो बेहद चिंताजनक हैं। कुछ राज्य सरकारें त्योहारों के समय भी सियासत करने से बाज नहीं आ रही हैं।
एक तरफ जहां अन्य सभी धर्मों के विशेष आयोजनों के लिए सड़कों पर बड़े-बड़े कार्यक्रम करने की पूरी छूट दी जाती है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय को सड़क पर नमाज अदा करने से जबरन रोका जा रहा है। शाही इमाम ने कहा कि ताकत के बल पर किसी एक समुदाय को रोकना और फिर अपनी ही पीठ थपथपाना देश की लोकतांत्रिक और स्वतंत्र प्रणाली के बिल्कुल विपरीत है।
‘नफरती ताकतों को नाकाम करने के लिए मुसलमान हर कुर्बानी को तैयार’
शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने ईद-उल-अजहा के असल मायनों को समझाते हुए कहा कि यह त्योहार हमें सिर्फ पशुओं की कुर्बानी देना नहीं, बल्कि देश और इंसानियत के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने का जज्बा सिखाता है। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें यह प्रेरणा देता है कि जब कभी भी हमारे वतन को हमारे प्राणों की या हमारी धन-दौलत की जरूरत पड़ेगी, हम उसे पेश करने में एक सेकंड की भी देरी नहीं करेंगे।
देश में सक्रिय फिरकापरस्त (सांप्रदायिक) ताकतों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग धर्म के नाम पर नफरत की दीवारें खड़ी कर रहे हैं। इन नफरती ताकतों को नाकाम करने के लिए अगर देश के मुसलमानों को कोई भी कुर्बानी देनी पड़ी, तो वे कभी पीछे नहीं हटेंगे।
लुधियाना में दिखा साझी संस्कृति और आपसी भाईचारे का खूबसूरत गुलदस्ता
लुधियाना में ईद का यह मौका सिर्फ एक समुदाय विशेष का न होकर आपसी भाईचारे का एक खूबसूरत गुलदस्ता नजर आया। कार्यक्रम में पहुंचे स्थानीय विधायक अशोक पराशर पप्पी और चौधरी मदन लाल बग्गा ने मुस्लिम समुदाय को गले लगाकर ईद की बधाई दी। नेताओं ने कहा कि लुधियाना की यह ऐतिहासिक जामा मस्जिद सिर्फ मुसलमानों का धार्मिक केंद्र नहीं है, बल्कि यह पंजाब की साझी संस्कृति, अमन और मोहब्बत की सबसे बड़ी मिसाल है।
पंजाब की रिवायत हमेशा से जोड़ने की रही है, तोड़ने की नहीं। जो लोग यहां नफरत फैलाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना चाहते हैं, उन्हें पंजाब की जनता कभी कामयाब नहीं होने देगी। इस अवसर पर पूर्व विधायक और जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय तलवाड़, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के मुख्य सेवादार प्रीतपाल सिंह, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि ईद का यह त्योहार हर भारतीय के लिए खुशियों का संदेश लेकर आता है।
देखा जाए तो लुधियाना की सभी छोटी-बड़ी मस्जिदों में नमाज के बाद पारंपरिक तरीके से कुर्बानियां दी गईं। त्योहार को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला, जो नए कपड़ों में सजे एक-दूसरे से गले मिलते नजर आए। अंत में, शाही इमाम पंजाब ने त्योहार के दौरान शहर में सुरक्षा और साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम करने के लिए लुधियाना पुलिस और नगर निगम प्रशासन का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।