नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुई इंडिया अलायंस (INDIA Alliance) की महाबैठक के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस बैठक में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समेत कुल 25 विपक्षी दलों ने शिरकत की, जहां सभी नेताओं ने बारी-बारी से देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर अपनी बात रखी। लेकिन इस बैठक की सबसे बड़ी सुर्खी समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से एक खास अपील की है। सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने बैठक में दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस को अब ‘बड़ा दिल’ दिखाना होगा। उनके इस बयान को सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के बीच होने वाले सीट शेयरिंग (सीटों के बंटवारे) के समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने उठाया ‘वोट चोरी’ का मुद्दा, मिल्कीपुर और बंगाल का किया जिक्र
सपा चीफ अखिलेश यादव ने बैठक के दौरान विपक्षी एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को सभी क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलना होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश ने इस हाई-प्रोफाइल बैठक में चुनाव के दौरान ‘वोट चोरी’ और धांधली का गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अयोध्या की हॉट सीट मानी जाने वाली मिल्कीपुर में वोट चोरी की गई।
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश से बाहर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का भी मुद्दा गठबंधन के नेताओं के सामने रखा। उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बंगाल में भी धांधली और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के जरिए ही भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतने में कामयाब रही। अखिलेश का यह आक्रामक रुख साफ करता है कि वे आगामी चुनावों में भाजपा की चुनावी रणनीति को लेकर बेहद सतर्क हैं और पूरे गठबंधन को भी अलर्ट कर रहे हैं।
कम सीटों पर लड़े कांग्रेस! क्या है अखिलेश की ‘जिताऊ और टिकाऊ’ रणनीति?
उत्तर प्रदेश में यह पहले ही साफ हो चुका है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एक साथ मिलकर मैदान में उतरेंगी। हालांकि, अभी तक दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर कोई अंतिम या औपचारिक बातचीत नहीं हो सकी है। ऐसे में अखिलेश यादव का यह ताजा बयान कई मायनों में बेहद अहम और रणनीतिक माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो अखिलेश ने इस बयान के जरिए कांग्रेस आलाकमान को बेहद चतुराई से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह यूपी में ‘बड़ा दिल’ दिखाते हुए कम से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए राजी हो। सपा इस बार ‘जिताऊ और टिकाऊ’ फॉर्मूले पर काम कर रही है, यानी उसी उम्मीदवार और पार्टी को टिकट मिले जिसकी जमीन पर जीतने की सबसे ज्यादा संभावना हो। सपा चीफ खुद कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि असली सवाल सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि सीट जीतने का है। जिसका जिस सीट पर मजबूत जनाधार होगा, वह सीट उसी के खाते में जाएगी।
कांग्रेस की 120 सीटों की मांग और सपा का अपना गणित
दूसरी तरफ, कांग्रेस खेमे से आ रही खबरों ने सपा की चिंता थोड़ी बढ़ा दी है। सूत्रों का दावा है कि लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित कांग्रेस उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कम से कम 120 सीटों की मांग आलाकमान के सामने रख सकती है। समाजवादी पार्टी इतनी बड़ी संख्या में सीटें कांग्रेस को देने के मूड में बिल्कुल नहीं है, क्योंकि सपा खुद को यूपी में मुख्य विपक्षी दल मानती है और उसका अपना जमीनी कैडर बहुत मजबूत है।
अब राजनीतिक पंडितों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अखिलेश यादव की इस ‘नसीहत भरी अपील’ का कांग्रेस नेतृत्व पर क्या असर पड़ता है। क्या राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे यूपी में बैकफुट पर जाकर सपा को ड्राइविंग सीट सौंपेंगे, या फिर सीटों के इस बंटवारे को लेकर इंडिया गठबंधन के इन दो बड़े साझेदारों के बीच आने वाले दिनों में कोई नया सियासी घमासान देखने को मिलेगा? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल अखिलेश के इस बयान ने यूपी की राजनीति का पारा जरूर बढ़ा दिया है।