हैदराबाद। तेलंगाना के मक्तल से आज एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित आधिकारिक कार्यक्रम में प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री वाकिटि श्रीहरि एक बड़े हादसे का शिकार होते-होते बचे। जब मंत्री तिरंगा फहरा रहे थे, तभी अचानक झंडे का भारी-भरकम पोल टूटकर नीचे गिर गया। इस घटना में मौके पर मौजूद कुछ लोग घायल हुए हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि मंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।
रस्सी खींचते ही भरभरा कर गिरा स्टील का पोल
यह पूरी घटना सोमवार सुबह करीब 9 बजे मक्तल तहसीलदार कार्यालय की है। मंत्री वाकिटि श्रीहरि मुख्य अतिथि के रूप में ध्वजारोहण के लिए पहुंचे थे। राष्ट्रगान के बाद जैसे ही उन्होंने तिरंगा फहराने के लिए रस्सी खींची, झंडा ऊपर जाने के बजाय पूरा का पूरा लोहे का खंभा ही जड़ से उखड़कर नीचे आ गिरा। अचानक हुए इस हादसे से वहां अफरा-तफरी मच गई। खंभा सीधा मंत्री के पास खड़े पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर गिरा, जिससे उन्हें मामूली चोटें आई हैं। मंत्री श्रीहरि उस वक्त पोल से चंद इंच की दूरी पर थे, जिस वजह से उनकी जान बाल-बाल बच गई।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे बड़े सवाल
इस हादसे ने तेलंगाना सरकार और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। यह पहली बार नहीं है जब राज्य में राष्ट्रीय पर्व पर ऐसी गड़बड़ी हुई हो। इससे पहले बीआरएस (BRS) नेता कोथा प्रभाकर द्वारा गलती से उल्टा झंडा फहराने का मामला भी गरमाया हुआ था, जिसे लेकर विपक्ष ने सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई थी। अब खंभा गिरने की इस घटना ने अधिकारियों की गंभीरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देशभर में गणतंत्र दिवस की धूम
एक तरफ जहाँ मक्तल में अव्यवस्था दिखी, वहीं दूसरी ओर भारत ने 77वें गणतंत्र दिवस पर अपनी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाया। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल मिसाइलों, घातक हथियारों और युद्धक विमानों ने पूरी दुनिया को भारत की ताकत दिखाई। इस बार की थीम ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ रही, जिसमें यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।