नई दिल्ली: यह एक कड़वा सच है कि दुनिया के लगभग हर कोने में महिलाएं पुरुषों की तुलना में लंबी उम्र जीती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? आखिर क्यों पुरुषों के शरीर में उम्र बढ़ने की रफ्तार तेज होती है और महिलाएं बढ़ती उम्र के साथ भी खुद को बेहतर तरीके से संभाल लेती हैं? वैज्ञानिकों ने इसके पीछे छिपे कई राज खोले हैं, जो न केवल हमारे लाइफस्टाइल बल्कि हमारे शरीर के भीतर होने वाले हार्मोनल खेल से भी जुड़े हैं।
जोखिम भरे काम या कुछ और?
एक पुरानी थ्योरी कहती है कि पुरुष अक्सर सेना, भारी उद्योगों या जोखिम वाले पेशों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ एक छोटा हिस्सा है। असली कहानी तो हमारे शरीर के भीतर चल रही ‘हार्मोनल जंग’ में छिपी है। रिसर्च के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में जो बदलाव आते हैं, वे पुरुषों और महिलाओं में बिल्कुल अलग होते हैं।
टेस्टोस्टेरोन: पुरुषों की ताकत और कमजोरी का राज
पुरुषों में ‘टेस्टोस्टेरोन’ नामक हार्मोन मांसपेशियों, हड्डियों की मजबूती और शारीरिक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है। ‘Verywellhealth’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, पुरुषों में इस हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर कमजोर महसूस करने लगता है, पेट के पास चर्बी जमा होने लगती है और हड्डियों का संतुलन बिगड़ने लगता है। टेस्टोस्टेरोन में आई यह कमी केवल कमजोरी ही नहीं, बल्कि डिप्रेशन, मोटापा, डायबिटीज और किडनी की बीमारियों को भी दावत देती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पुरुषों में यह हार्मोन जितनी तेजी से गिरता है, उनकी उम्र उतनी ही कम होने का खतरा रहता है।
महिलाओं में हार्मोनल बदलाव का गणित
महिलाओं में भी हार्मोनल बदलाव होते हैं, लेकिन उनका तरीका अलग है। महिलाओं का शरीर ‘एस्ट्रोजन’ पर निर्भर करता है, जो सूजन कम करने, मांसपेशियों की मरम्मत और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है। दिलचस्प बात यह है कि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे गिरता है, जबकि महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर अचानक और बहुत तेजी से गिरता है। इसके बावजूद, महिलाएं इस बदलाव के साथ खुद को ढालने में पुरुषों से बेहतर पाई गई हैं।
दिमाग की उम्र: किसका ब्रेन होता है ज्यादा ‘बूढ़ा’?
सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग की उम्र भी दोनों में अलग रफ्तार से बढ़ती है। शोध बताते हैं कि औसतन पुरुषों का दिमाग व्यावहारिक रूप से महिलाओं की तुलना में थोड़ा ज्यादा ‘बूढ़ा’ हो सकता है। दिमाग के बूढ़े होने की प्रक्रिया आपकी लाइफस्टाइल, वजन और सामाजिक जुड़ाव पर निर्भर करती है। पुरुषों में स्ट्रोक और डायबिटीज जैसे खतरे दिमाग की उम्र बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
लाइफस्टाइल में छिपा है जवानी का नुस्खा
इन सबके अलावा जेनेटिक्स एक बड़ा फैक्टर है जिसे हम बदल नहीं सकते। लेकिन अच्छी खबर यह है कि खान-पान, पर्याप्त नींद और फिजिकल एक्टिविटी के जरिए उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। पुरुष अक्सर अपनी सेहत को लेकर लापरवाही बरतते हैं, जबकि समय पर ध्यान देकर वे भी अपनी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ को धीमा कर सकते हैं।