गणतंत्र दिवस के मौके पर जहाँ पूरा देश देशभक्ति के रंग में डूबा था, वहीं उत्तराखंड के कोटद्वार से भाईचारे की एक ऐसी मिसाल सामने आई जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। यह घटना भले ही छोटी सी थी, लेकिन इसका संदेश बहुत बड़ा था। एक बुजुर्ग की इज्जत बचाने के लिए एक युवक जिस तरह ढाल बनकर खड़ा हुआ, उसने साबित कर दिया कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। इस युवक ने भीड़ के सामने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था, लेकिन अब उसकी असली पहचान खुलकर सामने आ गई है।
26 जनवरी को क्या हुआ था?
देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, तभी कोटद्वार में एक दुकान पर माहौल गरमा गया। वकील अहमद नाम के एक बुजुर्ग अपनी दुकान पर हमेशा की तरह बैठे हुए थे। तभी कुछ युवक वहां पहुंचे और दुकान के बोर्ड पर छपे नाम को लेकर आपत्ति जताने लगे। युवकों ने पहले तो हंगामा किया और फिर बुजुर्ग पर दबाव बनाने लगे कि वे अपनी दुकान का नाम बदलें। बुजुर्ग खुद को अकेला और लाचार महसूस कर रहे थे और मामला बढ़ता जा रहा था।
जब ‘मोहम्मद दीपक’ बनकर बीच में आया युवक
हंगामा बढ़ता देख वहां मौजूद एक युवक दीपक कश्यप बीच-बचाव करने उतर आए। जब गुस्साए युवकों ने दीपक को रोका और उनसे उनका नाम पूछा, तो उन्होंने बिना डरे जवाब दिया— “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” उनका यह जवाब सुनकर हंगामा कर रहे लोग सन्न रह गए। दीपक का मकसद किसी को गुमराह करना नहीं, बल्कि उस बुजुर्ग को यह अहसास दिलाना था कि वे अकेले नहीं हैं और इस समाज में दीपक और मोहम्मद के बीच कोई फर्क नहीं है।
अब सामने आया असली नाम
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग ‘मोहम्मद दीपक’ को ढूंढने लगे। अब खुलासा हुआ है कि उस बहादुर युवक का असली नाम दीपक कश्यप है। दीपक ने बताया कि उन्होंने वह नाम सिर्फ उस वक्त की गंभीर स्थिति को संभालने और बुजुर्ग को हौसला देने के लिए लिया था। दीपक के इस कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है और लोग उन्हें असली ‘गणतंत्र का सिपाही’ बता रहे हैं।